सीजी भास्कर, 07 जून : गुजरात के सूरत शहर में रविवार को एक दर्दनाक औद्योगिक हादसे (Surat Factory Accident) में चार मजदूरों की मौत हो गई। एक ज्वेलरी निर्माण इकाई के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से चारों श्रमिक बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सफाई के लिए टैंक में उतरे थे मजदूर
जानकारी के अनुसार सूरत (Surat Factory Accident) के अश्विनी कुमार क्षेत्र स्थित एक ज्वेलरी फैक्ट्री में गहनों की सफाई से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को एक विशेष टैंक में संग्रहित किया जाता था। इस टैंक की नियमित रूप से सफाई की जाती थी।
शनिवार सुबह चार मजदूर टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे थे। इसी दौरान टैंक के भीतर जहरीली गैस का प्रभाव बढ़ गया, जिससे उनका दम घुटने लगा और वे बेहोश होकर अंदर ही गिर पड़े। घटना की जानकारी मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और सभी मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
दम घुटने से मौत की आशंका
सूरत जोन-1 के पुलिस उपायुक्त Alok Kumar ने बताया कि प्रारंभिक जांच में चारों मजदूरों की मौत दम घुटने के कारण होने की आशंका है। हालांकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस के अनुसार टैंक के भीतर मौजूद गैसों की प्रकृति और सुरक्षा उपायों की स्थिति की भी जांच की जा रही है।
सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल पर सवाल
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि मजदूरों (Surat Factory Accident) ने टैंक में उतरते समय आवश्यक सुरक्षा उपकरणों का उपयोग नहीं किया था। औद्योगिक सुरक्षा मानकों के अनुसार ऐसे बंद स्थानों (Confined Space) में प्रवेश से पहले गैस परीक्षण, ऑक्सीजन स्तर की जांच और सुरक्षा किट का उपयोग अनिवार्य माना जाता है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने बताया कि घटना से पहले सुपरवाइजर द्वारा फायर विभाग को सूचना दी गई थी। हादसे के बाद पुलिस ने फैक्ट्री परिसर से सीसीटीवी फुटेज, सुरक्षा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी व्यक्ति या संस्था की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सेप्टिक टैंक और बंद संरचनाओं की सफाई के दौरान गैस मॉनिटरिंग, ऑक्सीजन जांच और सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए, ताकि इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोका जा सके।



