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Tadmetla Case : 76 जवानों की शहादत वाले मामले में बड़ा फैसला, अदालत ने जांच पर उठाए गंभीर सवाल

By Newsdesk Admin
08/05/2026
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सीजी भास्कर, 08 मई। ताड़मेटला नरसंहार मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद छत्तीसगढ़ में एक बार फिर उस दर्दनाक घटना की चर्चा तेज हो गई है। सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी शहादतों में गिने जाने वाले इस मामले में अदालत की टिप्पणी ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फैसले के बाद कानूनी और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है।

Contents
  • हाईकोर्ट ने बरकरार रखा निचली अदालत का फैसला
  • अदालत ने गिनाईं जांच की बड़ी खामियां Tadmetla Case
  • हथियार और दस्तावेजों पर भी सवाल
  • घायल जवानों की गवाही नहीं ली गई Tadmetla Case
  • भविष्य के लिए अदालत की नसीहत
  • देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में था शामिल

बिलासपुर में सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि इतने बड़े मामले में भी जांच एजेंसियां अदालत के सामने ऐसे सबूत पेश नहीं (Tadmetla Case) कर सकीं जिनसे आरोपियों की भूमिका साबित हो पाती। फैसले के बाद अब जांच प्रक्रिया और साक्ष्य जुटाने के तरीकों पर चर्चा शुरू हो गई है।

हाईकोर्ट ने बरकरार रखा निचली अदालत का फैसला

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही सभी आरोपियों को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया।

अदालत ने गिनाईं जांच की बड़ी खामियां Tadmetla Case

फैसले में अदालत ने कहा कि किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने आरोपियों की पहचान नहीं की थी। कोर्ट ने यह भी बताया कि मामले में टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड तक नहीं कराई गई। फॉरेंसिक रिपोर्ट भी अदालत के सामने पेश नहीं की गई थी।

हथियार और दस्तावेजों पर भी सवाल

अदालत ने कहा कि जब्त हथियार आरोपियों के कब्जे से बरामद नहीं हुए थे। इसके अलावा शस्त्र अधिनियम से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराए गए। कोर्ट के मुताबिक परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी भी पूरी तरह साबित नहीं हो सकी।

घायल जवानों की गवाही नहीं ली गई Tadmetla Case

हाईकोर्ट ने घायल जवानों की गवाही नहीं लेने को भी जांच एजेंसियों की बड़ी चूक माना। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में निचली अदालत के पास आरोपियों को बरी करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचा था।

भविष्य के लिए अदालत की नसीहत

फैसले के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को भविष्य में गंभीर मामलों की जांच ज्यादा वैज्ञानिक और पेशेवर तरीके से करने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों की कमी से न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है।

देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में था शामिल

गौरतलब है कि 6 अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा जिले के ताड़मेटला जंगल में सुरक्षाबलों पर बड़ा हमला (Tadmetla Case) हुआ था। इस हमले में सीआरपीएफ के 75 जवानों समेत कुल 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। यह देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है।

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