सीजी भास्कर, 16 मई : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली तांदुला नदी (Tandula Eco-Riverfront) के पुनर्जीवन, सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक और आधुनिक शुरुआत की गई है। जिला प्रशासन बालोद द्वारा इस नदी को एक नया, स्वच्छ और आकर्षक स्वरूप देने के लिए ‘तांदुला नदी पुनर्जीवन एवं इको-रिवरफ्रंट विकास परियोजना’ के तहत यूएवी (UAV) ड्रोन सर्वेक्षण कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया है। जिला मुख्यालय बालोद के समीप ग्राम देउरतराई मैदान में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम में इस महत्वाकांक्षी सर्वे को हरी झंडी दिखाई गई।
जिला प्रशासन और IIT भिलाई की साझेदारी
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण है। जिला प्रशासन बालोद और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई ने आपस में हाथ मिलाया है ताकि पारंपरिक तरीकों के बजाय एक तकनीकी और वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार की जा सके। यह आधुनिक पहल न केवल नदी का जीर्णोद्धार करेगी, बल्कि क्षेत्र में पारिस्थितिक संतुलन और जल संरक्षण के नए मानक स्थापित करेगी।
शुभारंभ कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद बालोद की अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी, अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक, एसडीएम नूतन कंवर और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता पीयूष देवांगन सहित देउरतराई, झलमला एवं हीरापुर के सरपंच, जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा यूएवी ड्रोन की विधिवत पूजा-अर्चना कर आकाश में सर्वे के लिए रवाना किया गया।
ड्रोन तकनीक से तैयार होगा हाई-टेक मॉडल
परियोजना के तहत, आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन के विषय विशेषज्ञ ड्रोन (Tandula Eco-Riverfront) तकनीक के माध्यम से तांदुला नदी क्षेत्र का हाई-रिजोल्यूशन (उच्च क्षमता) सर्वे कर रहे हैं। इस सर्वे से प्राप्त विस्तृत डेटा, तकनीकी विश्लेषण और फील्ड आधारित अध्ययन के आधार पर एक व्यावहारिक मॉडल तैयार किया जाएगा।

विशेषज्ञों की यह टीम अपनी तकनीकी रिपोर्ट में तांदुला नदी से लेकर हीरापुर तक के क्षेत्र में जल स्रोतों के संवर्धन, सौंदर्यीकरण और जैव विविधता संरक्षण के उपाय सुझाएगी। इस वैज्ञानिक सत्यापन के बाद धरातल पर क्रियान्वयन की मुख्य कार्ययोजना विकसित की जाएगी।
3 किलोमीटर क्षेत्र में बनेगा ‘इको-रिवरफ्रंट’
परियोजना के प्रथम चरण में तांदुला नदी (Tandula Eco-Riverfront) के चयनित लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में ‘रिवर इकोसिस्टम संरक्षण’ और ‘रिवरफ्रंट डेवलपमेंट’ का कार्य किया जाएगा। इसके तहत वैज्ञानिक टीम नदी की प्राकृतिक जलधारा, उसके तटों (बैंकों) की संरचना, पानी की शुद्धता (क्वालिटी), मौसमी बदलावों और स्थानीय वनस्पतियों व जीवों का गहन अध्ययन करेगी।

उद्देश्य यह है कि नदी को एक स्वच्छ, संतुलित और सतत स्वरूप दिया जा सके, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से भी आकर्षक हो। जिला प्रशासन का दावा है कि तैयार किया जा रहा यह मॉडल भविष्य में पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए वैज्ञानिक नदी पुनर्जीवन का एक उत्कृष्ट और अनुकरणीय उदाहरण बनेगा।
आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित होगा जल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के इस संयुक्त प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि तांदुला नदी बालोद की आत्मा है और इसका संवर्धन आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने तथा प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया एक दूरदर्शी कदम है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस तकनीकी पहल से तांदुला नदी शीघ्र ही अपने नए और वैभवशाली स्वरूप में नजर आएगी।



