सीजी भास्कर, 23 सितंबर। राज्य के करीब एक लाख शिक्षक इस समय गहरे असमंजस में हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने उनकी नौकरी पर संकट खड़ा कर दिया है। यह आदेश खासकर उन शिक्षकों पर लागू होता है जिन्होंने अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) (Teacher Eligibility Test Crisis) पास नहीं की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन्हें पांच साल में टीईटी पास नहीं करना है, उन्हें या तो इस्तीफा देना होगा या फिर अनिवार्य सेवानिवृत्ति स्वीकार करनी होगी। इस आदेश के बाद शिक्षकों की नजरें अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिक गई हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में भी ढाई लाख से ज्यादा शिक्षक बिना टीईटी पढ़ा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश को देखते हुए योगी सरकार ने कोर्ट में रिवीजन याचिका (Teacher Eligibility Test Crisis) दायर करने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ के शिक्षक मानते हैं कि यदि यूपी को इस मामले में कोई राहत मिलती है, तो यह उनके लिए भी एक बड़ा सहारा साबित हो सकता है।
छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस संबंध में अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। वहीं शालेय शिक्षक संघ ने सरकार से मांग की है कि कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता (Teacher Eligibility Test Crisis) से छूट दी जाए और विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए। संगठन के अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर पुनर्विचार याचिका लगाने की मांग की है, ताकि किसी भी शिक्षक की नौकरी खतरे में न पड़े।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को बड़ा आदेश दिया था। इसमें कहा गया कि अब नौकरी और पदोन्नति के लिए सभी शिक्षकों को टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। यह आदेश सभी सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों पर लागू होगा, हालांकि अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त स्कूलों को इसमें छूट मिलेगी।
आदेश की मुख्य बातें :
जिनकी सेवा अवधि पांच साल से ज्यादा बची है, उन्हें टीईटी पास (Teacher Eligibility Test Crisis) करना होगा।
जिनकी सेवा अवधि पांच साल से कम है, उन्हें टीईटी देना जरूरी नहीं होगा, लेकिन पदोन्नति चाहिए तो परीक्षा पास करनी होगी।
टीईटी परीक्षा की तैयारी
राज्य सरकार ने टीईटी परीक्षा की तैयारी तेज कर दी है। अधिसूचना दिसंबर 2025 तक जारी होने और परीक्षा फरवरी 2026 में संभावित है। व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) ने एससीईआरटी के प्रस्ताव पर प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक प्रदेश में 2011, 2014, 2016, 2017, 2019, 2022 और 2024 में टीईटी परीक्षा (Teacher Eligibility Test Crisis) हो चुकी है और इसकी वैधता आजीवन रहेगी।
भर्ती प्रक्रिया पर असर
राज्य के सरकारी स्कूलों में करीब 40 हजार पद खाली हैं। सरकार इस वर्ष पांच हजार पद भरने की तैयारी कर रही है। मौजूदा समय में 1,88,721 शिक्षक कार्यरत हैं। सुप्रीम कोर्ट का आदेश न केवल वर्तमान शिक्षकों बल्कि भावी उम्मीदवारों के लिए भी टीईटी परीक्षा (Teacher Eligibility Test Crisis) को अनिवार्य बना देता है।





