सीजी भास्कर, 29 मई। छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाएं गुरुवार को अचानक प्रभावित (Tehsildar Strike) नजर आईं। कई जिलों में तहसील कार्यालयों का कामकाज धीमा पड़ गया और लोगों को जरूरी दस्तावेजों तथा राजस्व संबंधी कार्यों के लिए इंतजार करना पड़ा। इसकी वजह अधिकारियों का सामूहिक विरोध प्रदर्शन बताया जा रहा है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
राज्यभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार एक घटना को लेकर नाराज हैं। अधिकारियों का कहना है कि उनके एक साथी अधिकारी के साथ हुई कथित मारपीट की घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर कई जिलों में काम बंद कर विरोध दर्ज कराया गया है।
पांच सौ से ज्यादा अधिकारी हड़ताल पर : Tehsildar Strike
जानकारी के अनुसार प्रदेश के 500 से अधिक तहसीलदार और नायब तहसीलदार विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। रायपुर, रायगढ़, सरगुजा समेत कई जिलों में राजस्व कार्य प्रभावित होने की खबर है। अधिकारियों की मुख्य मांग मामले में नामजद जनप्रतिनिधि की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की बताई जा रही है। इसके चलते नामांतरण, सीमांकन और अन्य राजस्व कार्यों पर असर पड़ा है।
मारपीट के आरोप के बाद बढ़ा विवाद
सरगुजा जिले के राजापुर उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने आरोप लगाया है कि उनके साथ मारपीट की गई। इस मामले में विधायक रामकुमार टोप्पो और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ गई, जिसके चलते विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ।
विधायक पक्ष ने भी लगाए आरोप
दूसरी ओर विधायक की बहन सीमा धनकी ने भी नायब तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जमीन संबंधी कार्य के लिए कार्यालय जाने पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहा गया। शिकायत के आधार पर नायब तहसीलदार के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इस तरह दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
जमीन के दस्तावेज को लेकर शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि जमीन से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने के लिए फाइल जमा (Tehsildar Strike) की गई थी। आरोप है कि काम में देरी को लेकर विवाद शुरू हुआ और बाद में मामला बढ़ता चला गया। महिला का कहना है कि उन्होंने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया था, जिसके बाद विवाद की स्थिति बन गई। वहीं अधिकारी पक्ष इन आरोपों को गलत बता रहा है।
अधिकारी ने सुनाई अपनी आपबीती
नायब तहसीलदार तुषार मानिक का आरोप है कि उनसे बहन के साथ कथित अभद्रता को लेकर सवाल पूछे गए और इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई। उनका कहना है कि उन्होंने किसी के साथ गलत व्यवहार नहीं किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग पहले से ही विवाद करने के इरादे से वहां पहुंचे थे। घटना के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
राजनीति भी हुई तेज
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्षी नेताओं ने घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासनिक संगठनों का कहना है कि जब तक मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रखने पर विचार किया जा सकता है।
जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस जांच कर (Tehsildar Strike) रही है। पूरे मामले की सच्चाई सामने आने का इंतजार किया जा रहा है। इस बीच हड़ताल के कारण आम लोगों के राजस्व संबंधी कई काम प्रभावित हुए हैं और अब सबकी नजर प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।




