सीजी भास्कर, 28 फरवरी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कार्रवाई के साथ समानांतर चल रही पुनर्वास और संवाद की रणनीति अब असर दिखाती नजर (Telangana Maoist Surrender) आ रही है। हाल ही में तेलंगाना में आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व माओवादी नेताओं ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से औपचारिक मुलाकात की। इस बैठक में देवजी, संग्राम, सुजाता, चंद्रन्ना, दामोदर और गगन्ना जैसे पूर्व उग्रवादी शामिल रहे। मुलाकात के दौरान पुनर्वास पैकेज, सुरक्षा आश्वासन और मुख्यधारा में सम्मानजनक वापसी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में शिवधर रेड्डी सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे और स्पष्ट किया गया कि आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि वे हिंसा का रास्ता छोड़ स्थायी जीवन की ओर बढ़ सकें।
इधर छत्तीसगढ़ से भी इसी तरह के संकेत सामने आए हैं। रायपुर पहुंचे लगभग 120 पुनर्वासित माओवादियों को विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन कराया गया, जिससे उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया, विधायी कार्यप्रणाली और शासन व्यवस्था की प्रत्यक्ष समझ (Telangana Maoist Surrender) मिल सके। अधिकारियों के अनुसार यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि भरोसा बहाली की रणनीति का हिस्सा है, ताकि पूर्व उग्रवादी लोकतांत्रिक ढांचे को समझें और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित हों।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बीते वर्षों में सख्त ऑपरेशनों के साथ पुनर्वास नीति को संतुलित तरीके से लागू करने का परिणाम अब दिखाई (Telangana Maoist Surrender) दे रहा है। आत्मसमर्पण की बढ़ती घटनाएं यह संकेत देती हैं कि जमीन पर बदलाव की इच्छा मौजूद है और सरकारें केवल बल प्रयोग के बजाय संवाद, पुनर्वास और विश्वास निर्माण की दिशा में भी काम कर रही हैं। यदि यह रफ्तार बनी रहती है तो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही अस्थिरता को स्थायी शांति में बदलने की संभावना और मजबूत हो सकती है।






