सीजी भास्कर, 28 फरवरी। छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित 32वें सामूहिक उपनयन संस्कार समारोह में 64 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार वैदिक रीति-विधान के साथ संपन्न हुआ।
राजधानी रायपुर स्थित विप्र सांस्कृतिक भवन में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत सुबह छह बजे से हुई, जहां मुंडन, हल्दी, पूजन और यज्ञोपवीत धारण की पारंपरिक प्रक्रिया विधिवत संपन्न कराई गई।
आचार्य ओमप्रकाश तिवारी के मार्गदर्शन में आयोजित इस संस्कार में मुख्य यजमान के रूप में विनय तिवारी और संध्या तिवारी सहित अष्टबंध ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बटुकों को यज्ञोपवीत धारण कराया।
विद्वानों ने उपनयन संस्कार के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे वैदिक अध्ययन, अनुशासन और जिम्मेदार जीवन की औपचारिक शुरुआत बताया। उन्होंने बटुकों को संयम, सदाचार, नियमित अध्ययन और कर्तव्य पालन का संदेश दिया।
संस्कार उपरांत बटुकों की प्रतीकात्मक बारात बैंड-बाजे के साथ निकाली गई, जो विप्र सांस्कृतिक भवन से ब्राह्मणपारा स्थित सोहागा मंदिर तक पहुंची। वहां भगवान मुरली मनोहर और राधा रानी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया गया।
समारोह में समाज के पदाधिकारी, महिला मंडल की सदस्याएं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक आशीर्वाद और प्रसाद वितरण के साथ हुआ, जिसमें पारंपरिक उल्लास और धार्मिक आस्था का संगम देखने को मिला।



