सीजी भास्कर, 18 नवंबर। छत्तीसगढ़ में शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी को पदोन्नति (TET Promotion Case Chhattisgarh) में अनिवार्य किए जाने का मुद्दा अब हाई कोर्ट पहुंच चुका है। शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नियमों में शामिल नहीं कर रही। इस पर सुनवाई करते हुए (TET Promotion Case Chhattisgarh) चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सरकार को नोटिस जारी किया।
अदालत ने स्पष्ट कहा है कि सरकार बताए कि पदोन्नति में टीईटी लागू करने पर उसका रुख क्या है। याचिकाकर्ता दिनेश कुमार साहू और अन्य शिक्षकों ने कहा है कि 2019 के भर्ती और पदोन्नति नियमों में टीईटी की अनिवार्यता दर्ज नहीं है। जबकि सुप्रीम कोर्ट, एनसीटीई और शिक्षा का अधिकार अधिनियम टीईटी को पदोन्नति के लिए अनिवार्य बताते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 से TET अनिवार्य किया था
याचिका के अनुसार (Supreme Court TET mandatory order) सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 से आदेश दिया था कि पदोन्नति के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा। जिन शिक्षकों के रिटायरमेंट में 5 वर्ष से कम हैं, उन्हें केवल सेवा जारी रखने की छूट मिलेगी। जिनके पास 5 वर्ष से अधिक सेवा शेष है, उन्हें 2 वर्षों के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बंबई हाई कोर्ट भी इसी आधार पर दो वर्षों की मोहलत दे चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने अब तक अपने नियमों में संशोधन नहीं किया, जिससे पदोन्नति प्रक्रिया अटकी हुई है।
(TET Promotion Case Chhattisgarh) शिक्षक संघों में बढ़ी चिंता
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू क्यों नहीं किए गए और आगे उसकी कार्ययोजना क्या है। अदालत ने अगली सुनवाई तक विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इधर, सहायक शिक्षक–समग्र शिक्षक फेडरेशन ने कहा है कि यदि शासन को व्यावहारिक कठिनाई दिखती है तो उसे अन्य राज्यों की तरह (TET promotion rules India) सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए।
पदोन्नति रोके जाने से हजारों शिक्षक प्रभावित
फेडरेशन के अनुसार राज्य में 20–25 हजार शिक्षक प्रमोशन की प्रतीक्षा में हैं। नियमों में संशोधन न होने से वरिष्ठता, चयन सूची और विभागीय पदोन्नति पर सीधा असर पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग इस मामले में कानूनी राय ले रहा है। जल्द ही नियम संशोधन या अंतरिम व्यवस्था पर निर्णय लिया जा सकता है।


