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दफनाने नहीं दे रहे, 13 दिन से मोर्चरी में रखा है शव, पिता की ‘अंतिम इच्छा’ पूरी करने हाईकोर्ट से अब सुप्रीम कोर्ट में बेटे ने दी दस्तक

By Newsdesk Admin
20/01/2025
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सीजी भास्कर, 20 जनवरी। गांव के निवासियों ने एक ईसाई व्यक्ति को गांव के कब्रिस्तान में दफनाने का विरोध कर दिया है जिससे परेशान होकर उसके बेटे रमेश बघेल ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला छत्तीसगढ़ के बस्तर का है।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक ईसाई व्यक्ति को गांव के कब्रिस्तान में दफनाने का विरोध हो रहा है। इस वजह से उनके बेटे रमेश बघेल को 13 दिनों से शव को मोर्चरी में रखना पड़ रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। रमेश बघेल ने  हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन 9 जनवरी को फैसला उनके पक्ष में नहीं आया। अब सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मिली जानकारी के अनुसार यह धार्मिक भेदभाव का मामला है। छत्तीसगढ़ पंचायत प्रावधान (अनुसूचित का विस्तार) नियम, 2021 लागू होने के बाद से बस्तर में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं। राज्य सरकार को इस बारे में पूरी जानकारी है। रमेश बघेल के पिता सुभाष पादरी थे, उनका 7 जनवरी को बीमारी के चलते निधन हो गया। रमेश के दादा ने तीन दशक पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। उनके दादा सहित दो रिश्तेदारों को छिंदवाड़ा गांव के कब्रिस्तान में दफनाया गया था। इस आदिवासी बहुल गांव के कई अन्य लोगों ने भी ईसाई धर्म अपनाया है। रमेश बघेल चाहते हैं कि उनके पिता की अंतिम इच्छा पूरी हो और उन्हें उनके परिवार के सदस्यों के बगल में दफनाया जाए। दो साल पहले तक सबकुछ ठीक था। फिर कुछ ग्रामीणों ने ईसाइयों का सामाजिक बहिष्कार करने के लिए लोगों को उकसाना शुरू कर दिया। उन्होंने धर्म परिवर्तन के कारण ईसाइयों को गांव के कब्रिस्तान में शव दफनाने से रोकने की बात कही। सामाजिक बहिष्कार के बाद से मजदूर रमेश के खेत में काम नहीं करते। उन्हें अपनी दशकों पुरानी किराने की दुकान भी बंद करनी पड़ी क्योंकि लोगों ने उनसे सामान खरीदना बंद कर दिया। रमेश ने अपने परिवार का समर्थन करने के लिए स्कूल छोड़ दिया था लेकिन अब उनकी आय के दोनों स्रोत बुरी तरह प्रभावित हैं। रमेश ने पुलिस से शिकायत की लेकिन पुलिस ने कथित तौर पर ग्रामीणों का पक्ष लिया। हाई कोर्ट ने यह याचिका खारिज करते हुए कहा कि इससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। आदेश में कहा गया है कि यह माना जाता है कि छिंदवाड़ा गांव में ईसाई समुदाय के लोगों के लिए कोई अलग कब्रिस्तान उपलब्ध नहीं है लेकिन सरकारी वकील और हस्तक्षेपकर्ता के वकील के अनुसार ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए अलग कब्रिस्तान कर्कपाल गांव में उपलब्ध है जो छिंदवाड़ा से 20-25 किलोमीटर दूर है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह अपने पिता का अंतिम संस्कार ईसाई धर्म के अनुसार करना चाहता है। इसलिए ईसाई समुदाय का कब्रिस्तान, पास के इलाके में उपलब्ध है, याचिकाकर्ता को राहत देना उचित नहीं होगा। इससे लोगों में अशांति और वैमनस्य फैल सकता है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील डिग्री प्रसाद चौहान ने कहा कि यह धर्म के आधार पर भेदभाव का स्पष्ट मामला है। छत्तीसगढ़ पंचायत प्रावधान (अनुसूचित का विस्तार) नियम, 2021 के लागू होने के बाद से बस्तर क्षेत्र में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं और राज्य सरकार स्थिति से पूरी तरह वाकिफ है।

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