भारतीय क्रिकेटर तिलक वर्मा की बल्लेबाजी का अंदाज हैदराबादी बिरयानी की तरह है। जिस तरह बिरयानी को बेहतरीन स्वाद देने के लिए समय और धैर्य की जरूरत होती है, उसी तरह तिलक भी पारी की शुरुआत में संभलकर खेलते हैं और मौका मिलते ही आक्रामक अंदाज में रन बनाते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ 24 अक्टूबर को क्राइस्टचर्च में खेली गई उनकी पारी इसका उदाहरण बनी, जिसमें उन्होंने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।
न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली मैच जिताऊ पारी
तिलक वर्मा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 26 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाए। पारी की शुरुआत में वह 9 गेंदों पर केवल 10 रन बना सके थे। उस समय रन रेट का दबाव बढ़ रहा था, लेकिन उन्होंने जल्दबाजी करने के बजाय अपनी बल्लेबाजी पर भरोसा बनाए रखा। इसके बाद उन्होंने तेजी से रन बनाते हुए टीम को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
तिलक का मानना रहा कि मैच को आखिरी समय तक ले जाना उनके खेल की रणनीति का हिस्सा है। वह परिस्थितियों को समझकर बल्लेबाजी करते हैं और सही समय आने पर बड़े शॉट लगाते हैं। उनकी यह शैली उन्हें दबाव वाले मुकाबलों में भी प्रभावी बनाती है।
इंग्लैंड के खिलाफ भी दिखा था यही अंदाज
तिलक वर्मा इससे पहले भी मुश्किल परिस्थितियों में अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। जनवरी 2025 में चेन्नई के चेपॉक मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ 166 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 10वें ओवर तक 78 रन पर पांच विकेट गंवा दिए थे। उस समय तिलक ने जिम्मेदारी संभाली और 55 गेंदों पर नाबाद 72 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई।
एशिया कप फाइनल में भी बने थे जीत के नायक
2025 एशिया कप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ भी तिलक की बल्लेबाजी ने भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। 147 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने चार ओवर में 20 रन पर तीन विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद तिलक ने धैर्य के साथ पारी को आगे बढ़ाया और 53 गेंदों पर नाबाद 69 रन बनाकर टीम को जीत तक पहुंचाया।
इन मुकाबलों से साफ होता है कि तिलक वर्मा दबाव में भी संयम बनाए रखते हैं। उनकी बल्लेबाजी में धैर्य, सही समय पर आक्रामकता और मैच की परिस्थितियों को समझने की क्षमता नजर आती है। यही वजह है कि धीमी शुरुआत के बावजूद वह पारी के अंतिम चरण में मैच का रुख बदलने का दम रखते हैं।



