सीजी भास्कर, रायपुर, 22 अक्टूबर। फरवरी 2022 में माओवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट में अपना एक पैर गंवाने वाले छत्तीसगढ़ के टोमन कुमार ने अपने हौसले और मेहनत से नई पहचान बनाई है। कभी देश की सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन में तैनात रहे टोमन आज तीरंदाजी में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। विश्व चैंपियन बनने के बाद अब उन्होंने शीतल देवी के साथ कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में एशियाई स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। टोमन कुमार की यह उपलब्धि (Toman Kumar Asian Gold Medal) संघर्ष के बाद दोबारा खड़े होने और लक्ष्य हासिल करने के जज्बे की मिसाल है।
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ऑपरेशन के दौरान बदली जिंदगी
बालोद जिले के अहिबर नवागांव निवासी टोमन कुमार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कोबरा बटालियन में जवान थे। फरवरी 2022 में झारखंड के लोहरदगा जिले के पेशरार थाना क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन डबल बुल के दौरान वह प्रेशर आईईडी की चपेट में आ गए। विस्फोट में उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा। देश की सेवा करते हुए मिले इस गंभीर जख्म ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। लंबे इलाज और पुनर्वास के दौरान उन्हें शारीरिक पीड़ा के साथ मानसिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। व्हीलचेयर पर निर्भर रहने के बाद कृत्रिम पैर के सहारे दोबारा खड़े होना उनके लिए बड़ी परीक्षा थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जीवन को नई दिशा देने का फैसला किया।
दर्द से उबरकर थामा धनुष
टोमन ने परिस्थितियों के सामने घुटने टेकने के बजाय खुद को दोबारा तैयार करने का फैसला किया। नवंबर 2023 में उन्होंने पैरा तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया। एक पैर के सहारे शरीर का संतुलन बनाना, निशाना साधना और लगातार अभ्यास करना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी।
उनकी लगन का नतीजा सितंबर 2024 में सामने आया, जब उनका चयन सीआरपीएफ की केंद्रीय तीरंदाजी टीम में हुआ। इसके बाद टोमन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की। टोमन कुमार की उपलब्धि (Toman Kumar Asian Gold Medal) तक पहुंचने के पीछे उनकी मेहनत, धैर्य और लगातार अभ्यास की अहम भूमिका रही।
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विश्व चैंपियन बनने का सफर
सितंबर 2025 में दक्षिण कोरिया में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में टोमन ने पुरुष कंपाउंड ओपन व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह पैरा तीरंदाजी में विश्व चैंपियन बनने वाले भारत के पहले पुरुष तीरंदाज बने।
इसके बाद अप्रैल 2026 में बैंकॉक पैरा तीरंदाजी सीरीज में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। यहां टोमन ने कंपाउंड पुरुष टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक अपने नाम किए। लगातार मिल रही सफलताओं ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पैरा तीरंदाजी में भारत का महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना दिया। टोमन का यह सफर (Toman Kumar Asian Gold Medal) उनकी लगातार मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
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शीतल देवी के साथ जीता स्वर्ण
पैरा एशियाई खेलों में टोमन कुमार ने शीतल देवी के साथ कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में इंडोनेशिया को 151-148 से हराकर खिताब अपने नाम किया। क्वालीफाइंग दौर में दोनों ने 1402 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड भी कायम किया। इस प्रदर्शन ने भारतीय जोड़ी की क्षमता और तालमेल को दिखाया। टोमन कुमार का स्वर्ण पदक (Toman Kumar Asian Gold Medal) उनकी खेल यात्रा की एक और बड़ी उपलब्धि है।
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संघर्ष बना दूसरों की प्रेरणा
टोमन कुमार का सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी बड़ी मुश्किल के बाद उम्मीद खोने लगते हैं। उन्होंने हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया, लेकिन अपने लक्ष्य तक पहुंचने का हौसला नहीं खोया। कृत्रिम पैर के सहारे दोबारा खड़े होकर धनुष थामना और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना उनकी इच्छाशक्ति का उदाहरण है। कभी वर्दी पहनकर देश की सुरक्षा में जुटे टोमन अब खेल के मैदान में तिरंगे का मान बढ़ा रहे हैं। उनकी उपलब्धियां बताती हैं कि शारीरिक चुनौती किसी व्यक्ति की क्षमता और सपनों की सीमा तय नहीं करती।
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