सीजी भास्कर, 15 अप्रैल : छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण (Lakhpati Didi Scheme) की बयार बह रही है। सरकार की दूरदर्शी योजनाओं ने ग्रामीण अंचल की महिलाओं के हाथों को न केवल काम दिया है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आजाद भी बनाया है। इसका सबसे जीवंत और प्रेरक उदाहरण गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत लालपुर की हमेश्वरी राठौर हैं। हमेश्वरी आज लखपति दीदी के रूप में अपनी एक नई पहचान बना चुकी हैं, जो कभी एक सामान्य गृहिणी हुआ करती थीं।
संघर्ष से सफलता की शुरुआत
हमेश्वरी राठौर का एक सफल उद्यमी बनने तक का सफर इतना आसान नहीं था। उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई जब वह “रिद्धी-सिद्धी स्वसहायता समूह” से जुड़ीं। यहां उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत न केवल आत्मविश्वास मिला, बल्कि तकनीकी प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग भी प्राप्त हुआ। समूह के माध्यम से उन्हें ₹5,50,000 का ऋण प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने लखपति दीदी (Lakhpati Didi Scheme) बनने के अपने सपने की नींव बनाया।
बहुआयामी व्यवसाय और कड़ी मेहनत
ऋण की राशि का उपयोग हमेश्वरी ने बहुत ही सूझबूझ के साथ किया। उन्होंने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर सब्जी उत्पादन को अपनी आय का मुख्य जरिया बनाया। आज वे अपने खेतों में टमाटर, गोभी, अदरक, बरबट्टी और हल्दी जैसी नकदी फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने ग्रामीण निर्माण क्षेत्र में मांग को देखते हुए सेंटरिंग प्लेट का कार्य भी शुरू किया। आय के इन विविध स्रोतों ने यह सुनिश्चित किया कि लखपति दीदी (Lakhpati Didi Scheme) बनने की उनकी राह में कोई आर्थिक अड़चन न आए।
बाधाओं को बनाया अवसर
हर उद्यमी की तरह हमेश्वरी के सामने भी मौसम की अनिश्चितता, बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ती लागत जैसी चुनौतियां आईं। लेकिन विष्णुदेव साय सरकार की जनहितैषी योजनाओं और बिहान के मार्गदर्शन ने उन्हें टूटने नहीं दिया। स्वसहायता समूह के सहयोग से उन्होंने हर बाधा को पार किया। यह उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज वह सालाना ₹1.5 लाख से ₹2 लाख तक की आय अर्जित कर रही हैं। समाज में आज उन्हें बड़े सम्मान के साथ लखपति दीदी (Lakhpati Didi Scheme) कहकर पुकारा जाता है।
सार्थक होती सरकारी योजनाएं
हमेश्वरी की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह साय सरकार की नीतियों की सफलता का प्रमाण है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को छोटे उद्योगों से जोड़कर उन्हें मुख्यधारा में लाना ही इस सरकार का लक्ष्य है। आज हमेश्वरी अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं और अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे रही हैं। उनकी कहानी क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही है कि वे भी लखपति दीदी (Lakhpati Didi Scheme) बनकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।


