सीजी भास्कर, 22 अगस्त : जनजातीय कारीगरों को बाजार से जोड़ने की पहल (Tribal Artisan Market) के तहत धमतरी में एक दिवसीय जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता मेला आयोजित किया गया। मेले में 20 कलाकारों और कारीगरों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने के बाद कारीगरों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों के विपणन का अवसर मिलेगा।
कारीगरों को मिलेगा राष्ट्रीय स्तर पर बाजार
धमतरी के लाइवलीहुड कॉलेज में जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन ट्राइफेड और जिला प्रशासन के संयुक्त आयोजन में जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता (एम्पैनलमेंट) मेला आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों के पारंपरिक हुनर (Tribal Artisan Market) को राज्य और राष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है।
मेले में जिले के 20 कलाकारों एवं कारीगरों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों और जनजातीय उद्यमियों को ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने का अवसर दिया गया।
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ट्राइफेड से जुड़े तो बढ़ेगा बाजार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि यह पहल जनजातीय कलाकारों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने के लिए प्रभावी मंच देगी। ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने के बाद कारीगर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों, ‘जनजातीय भारत’ बिक्री केंद्रों और विभिन्न मेलों में शामिल हो सकेंगे।
इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार और कारीगरों को आय के नए अवसर मिलेंगे। पारंपरिक कला और शिल्प को बाजार से जोड़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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सोशल मीडिया से ग्राहकों तक पहुंचने की सलाह
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि आजीविका से जुड़ी गतिविधियां केवल आय का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि जनजातीय समाज की पारंपरिक कला, कौशल और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित उत्पादों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए।
उन्होंने कारीगरों से सोशल मीडिया का प्रभावी इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कारीगर सीधे ग्राहकों तक पहुंच बना सकते हैं और अपने उत्पादों की बाजार क्षमता बढ़ा सकते हैं।
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प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर जोर
कलेक्टर ने युवाओं और जनजातीय समाज के लोगों को प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
नगरी क्षेत्र में उपलब्ध सतावर के साथ लाख, इमली और अन्य वन उपज का वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रसंस्करण कर बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना सहित उद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया।
कारीगरों को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण
कलेक्टर ने बताया कि जिले के जनजातीय कारीगरों का विशेष बैच तैयार कर उन्हें सोशल मीडिया मार्केटिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार प्रबंधन और उत्पाद प्रस्तुतीकरण का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसका उद्देश्य पारंपरिक कौशल को आधुनिक उद्यमिता से जोड़ना है।
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पारंपरिक कला को मिलेगी नई पहचान
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष जेएल ध्रुव ने कहा कि जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, कला और शिल्प शैली को उचित बाजार उपलब्ध कराने की जरूरत है। बेहतर मार्केट लिंकेज मिलने से कारीगरों की आय और जीवन स्तर में सुधार हो सकता है।
मेले में वस्त्र एवं हस्तकला, धातु शिल्प, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद, मिट्टी शिल्प, बांस एवं बेंत शिल्प, जनजातीय आभूषण, उपहार सामग्री और चित्रकला सहित विभिन्न उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
ट्राइफेड नेटवर्क से जुड़ने की दिशा में कदम
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ने कहा कि यह मेला जिले के जनजातीय कारीगरों और उद्यमियों को ट्राइफेड के व्यापक विपणन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों और जनजातीय उद्यमियों से ऐसे अवसरों का लाभ उठाने की अपील की गई।
जनजातीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने की यह पहल कारीगरों के पारंपरिक हुनर को आर्थिक अवसर में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है (Tribal Artisan Market)।




