सीजी भास्कर, 6 दिसंबर | Tribal Leader Death Inquiry: कांग्रेस ने मौत को बताया ‘षड्यंत्र’, सरकार पर गंभीर आरोप
चारामा के पूर्व जनपद अध्यक्ष और आदिवासी समाज के प्रमुख चेहरे जीवन ठाकुर की मौत ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस का कहना है कि यह कोई सामान्य मृत्यु नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध साजिश (Tribal Leader Death Inquiry) है, जिसके पीछे सरकार की मंशा राजनीतिक विरोधियों को चुप कराना है। कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि विरोधी नेताओं को फर्जी मामलों में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है और वहीं उन्हें प्रताड़ित कर ‘खामोश’ करने की कोशिश की जा रही है।
Tribal Leader Death Inquiry: कांग्रेस का आरोप—जेल में दी गई यातनाओं ने ली जान
दीपक बैज ने दावा किया कि जीवन ठाकुर आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहे, और यही कारण था कि वे सरकार के निशाने पर थे। उनका आरोप है कि जेल के भीतर ठाकुर को गंभीर अत्याचार झेलने पड़े, इलाज में लापरवाही बरती गई और इन्हीं परिस्थितियों के चलते उनकी जान गई। कांग्रेस ने मांग की है कि संबंधित जेल अधिकारी, विशेषकर कांकेर जेल प्रशासन पर तत्काल कठोर कार्रवाई हो।
आदिवासी नेताओं पर बढ़ते दबाव का मुद्दा फिर उछला
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में आदिवासी नेताओं को फर्जी मामलों में कैद किया गया। कई आदिवासी, कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए और जल–जंगल–जमीन की लड़ाई लड़ने वाले हर आवाज को सत्ता दबाने में लगी हुई है। बैज ने आरोप लगाया कि कॉर्पोरेट हितों की रक्षा के लिए सरकार ने आदिवासी समाज के खिलाफ एक ‘अनौपचारिक डेथ वारंट’ जारी कर रखा है।
Tribal Leader Death Inquiry: पेसा कानून के उल्लंघन का आरोप भी गूंजा
आरोपों की सूची में यह भी शामिल है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पेसा कानून का लगातार उल्लंघन हो रहा है। सरगुजा से लेकर बस्तर तक जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें सरकारी दमन का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस के मुताबिक, जीवन ठाकुर की मौत इस ‘दमनकारी रवैये’ का ताज़ा उदाहरण है।
कांग्रेस की चेतावनी—जांच नहीं हुई तो होगा बड़ा आंदोलन
दीपक बैज ने कहा कि यदि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच तुरंत शुरू न हुई, तो कांग्रेस प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन करेगी। उनके मुताबिक, “यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आवाज को दबाने की कोशिश है।”
Tribal Leader Death Inquiry: 4 दिसंबर को हुई थी मौत, परिवार ने लगाया हत्या का आरोप
49 वर्षीय जीवन ठाकुर की मौत 4 दिसंबर को हुई। उन्हें 12 अक्टूबर को कांकेर पुलिस ने फर्जी वन पट्टा मामले में गिरफ्तार किया था। 2 दिसंबर को उन्हें कांकेर जिला जेल से रायपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया गया, और उसी दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
अस्पताल में भर्ती करवाने के बाद सुबह करीब 8 बजे उनकी मौत दर्ज की गई। परिवार का आरोप है कि उन्हें मौत की सूचना देर शाम तक नहीं दी गई और प्रशासन ने कई जानकारी छिपाई।
Local Reaction: 30 घंटे अंतिम संस्कार न करने का विरोध, आदिवासी नेताओं की चेतावनी
आदिवासी समाज ने मामले को लेकर गहरा आक्रोश जताया है। परिजनों ने 30 घंटे तक अंतिम संस्कार नहीं किया और जेल प्रशासन पर हत्या, गंभीर लापरवाही और सूचना छिपाने का आरोप लगाया।
आदिवासी नेता सुमेर सिंह नाग और गौतम कुंजाम ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय पर कार्रवाई नहीं की, तो समाज बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगा।
Administration Statement: जेल अधिकारियों के बयान पर भी उठे सवाल
कांकेर सहायक जेल अधीक्षक रेणु ध्रुव का कहना है कि 4 दिसंबर की सुबह करीब 4 बजे जीवन ठाकुर को अस्पताल भेजा गया था। जबकि परिजन सुबह से रात तक सूचना न मिलने का आरोप लगा रहे हैं। विधायक सावित्री मंडावी ने इस विरोधाभास पर गहन जांच की मांग की है।





