सीजी भास्कर, 19 सितम्बर | बिलासपुर में एक अनोखा फैसला सामने आया है। TTE Chain Pulling Case High Court Verdict (टीटीई चेन पुलिंग केस हाई कोर्ट वर्डिक्ट) में न्यायालय ने 15 साल पुराने वेतन कटौती और डिमोशन के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि चेन पुलिंग बिना उचित कारण के की गई है, तब तक इसे अपराध नहीं माना जा सकता।
साल 2010 की घटना से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला 15 जुलाई 2010 से जुड़ा है। उस समय टीटीई आस्टिन हाइड (Austin Hyde) यशवंतपुर एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 2252) में सफर कर रहे थे। आरोप था कि उन्होंने दो बार ट्रेन की चेन खींची ताकि उनका परिवार और सामान ट्रेन में चढ़ सके। रेलवे ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए विभागीय जांच कराई।
विभागीय जांच और सजा का सिलसिला
TTE Chain Pulling Case High Court Verdict के मुताबिक, रेलवे ने आरपीएफ के दो जवानों को गवाह बनाया। उनके बयान के आधार पर आस्टिन को दोषी मानते हुए साल 2012 में उनकी वेतनवृद्धि रोक दी गई, डिमोशन किया गया और दो साल के लिए वेतन कटौती की सजा दी गई। बाद में विभागीय अपील और पुनरीक्षण अपील भी खारिज हो गई।
CAT ने भी रखा रेलवे का पक्ष
आस्टिन हाइड ने इस फैसले को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में चुनौती दी। लेकिन, वहां भी उनके खिलाफ निर्णय दिया गया। TTE Chain Pulling Case High Court Verdict में यह साफ दिखता है कि कैट ने रेलवे की कार्रवाई को सही ठहराया था और उनकी अपील को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत
आस्टिन ने आखिरकार हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आरोप अस्पष्ट थे। गवाहों ने केवल चेन खींचने की बात कही, लेकिन यह सिद्ध नहीं किया कि यह बिना कारण हुआ। इसलिए TTE Chain Pulling Case High Court Verdict में सभी पुराने आदेश (2012 से 2023 तक) रद्द कर दिए गए।
कोर्ट ने साफ किया कानूनी पहलू
हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 141 के अनुसार, यदि कोई यात्री (Passenger) पर्याप्त कारण के बिना चेन खींचे तभी इसे अपराध माना जाएगा। इस मामले में आरोप अस्पष्ट थे और ठोस सबूत नहीं थे। इसलिए कर्मचारी को 15 साल बाद न्याय मिला।
कर्मचारियों के लिए नजीर बना फैसला
यह फैसला न केवल आस्टिन हाइड के लिए बल्कि भविष्य के मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। TTE Chain Pulling Case High Court Verdict ने यह स्पष्ट कर दिया कि बिना ठोस और उचित कारण बताए किसी भी कर्मचारी को सजा देना अनुचित है।





