सीजी भास्कर, 20 दिसंबर | Ujjain Water Dispute Protest : उज्जैन जिले के माकड़ोन क्षेत्र में डैम के पानी के बंटवारे को लेकर वर्षों पुराना तनाव शुक्रवार को खुलकर सामने आ गया। सुबह से ही किसान मंडी गेट के पास सड़क पर बैठ गए, जिससे करीब तीन घंटे तक आवाजाही पूरी तरह ठप रही। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, वहीं प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं।
किसानों का आरोप है कि पड़ोसी डेलची गांव के कुछ लोगों ने रात के अंधेरे में पैतीसा डैम से माकड़ोन की ओर जाने वाली सिंचाई पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाया। मोटर उखाड़कर फेंक दी गई और कई पाइप तोड़ दिए गए। बताया जा रहा है कि यह विवाद नया नहीं है, बल्कि पिछले करीब छह साल से दोनों गांवों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर खींचतान चल रही है।
सुबह जब किसानों ने टूटी हुई पाइपलाइन देखी तो गुस्सा फूट पड़ा। करीब 200 से अधिक किसान सड़क पर बैठ गए। जाम सुबह लगभग 10 बजे शुरू हुआ और दोपहर 1 बजे तक जारी रहा। किसानों का कहना है कि इस वक्त गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है और ऐसे समय में सप्लाई बाधित होना सीधे रोजी-रोटी पर असर डालता है।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि डैम में पहले से ही पानी सीमित है, ऐसे में हर साल सिंचाई के मौसम में विवाद खड़ा हो जाता है। कई किसानों ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया, जिससे हालात हर बार तनावपूर्ण हो जाते हैं।
प्रशासन की ओर से तहसीलदार नवीन कुंभकार ने बताया कि मामले में 15 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही है। प्रारंभिक जानकारी में करीब 35 किसानों की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त पाई गई है। प्रशासन दोनों गांवों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर समाधान निकालने की तैयारी कर रहा है।
ग्रामीण राधेश्याम ने बताया कि अनुमति होने के बावजूद हर साल फसल पकने के समय मोटर, पाइप और स्टार्टर को नुकसान पहुंचाया जाता है। उनके मुताबिक, एक किसान को 20 से 25 हजार रुपये तक का नुकसान हुआ है। किसानों ने मांग की है कि दोषियों से भरपाई कराई जाए और पानी के बंटवारे का स्थायी फार्मूला तय किया जाए।





