सीजी भास्कर, 25 दिसंबर। रूस-यूक्रेन युद्ध में इस बार मोर्चा गोलियों से आगे निकलकर सीधे ऊर्जा नसों पर आ टिका है। यूक्रेन ने रूस के तेल और गैस (Ukraine Russia War) से जुड़े अहम ठिकानों पर सटीक और गहरे हमले कर यह संकेत दे दिया है कि अब लड़ाई केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहने वाली।
यूक्रेनी वायुसेना ने ब्रिटेन निर्मित स्टॉर्म शैडो क्रूज मिसाइलों और स्वदेशी लंबी दूरी के ड्रोन के ज़रिए रूस के दक्षिणी और पश्चिमी इलाकों में कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया।
रिफाइनरी पर मिसाइल प्रहार, ईंधन आपूर्ति को झटका
यूक्रेन के जनरल स्टाफ के अनुसार, एयरफोर्स ने रूस के रोस्तोव क्षेत्र में स्थित नोवोशाख्तिंस्क तेल रिफाइनरी पर स्टॉर्म शैडो मिसाइलों से हमला किया। धमाकों की आवाज़ों और आग की लपटों के साथ यह इलाका कुछ देर के लिए युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया।
यह रिफाइनरी दक्षिणी रूस में तेल उत्पादों की बड़ी सप्लायर मानी (Ukraine Russia War) जाती है और रूसी सैन्य अभियानों के लिए डीज़ल व जेट फ्यूल की अहम कड़ी है। ऐसे में इस हमले को केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक चोट के तौर पर देखा जा रहा है।
बंदरगाह से गैस प्लांट तक ड्रोन की पहुंच
यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी SBU के मुताबिक, स्वदेशी लंबी दूरी के ड्रोन ने क्रास्नोदार क्षेत्र के टेमरयुक बंदरगाह पर रखे ऑयल टैंकों को निशाना बनाया। हमले के बाद दो टैंकों में भीषण आग लगी, जो लगभग 2,000 वर्ग मीटर इलाके में फैल गई।
इतना ही नहीं, दक्षिण-पश्चिमी रूस के ओरेनबर्ग इलाके में स्थित एक विशाल गैस प्रोसेसिंग प्लांट पर भी ड्रोन स्ट्राइक की गई। यूक्रेनी सूत्रों का दावा है कि यह प्लांट दुनिया के सबसे बड़े गैस प्रोसेसिंग केंद्रों में गिना जाता है और यूक्रेन की सीमा से करीब 1,400 किलोमीटर दूर है—जो यूक्रेन की बढ़ती हमलावर क्षमता को साफ दर्शाता है।
सैन्य हवाई अड्डा भी रडार पर
हमलों की कड़ी यहीं नहीं रुकी। यूक्रेनी जनरल स्टाफ ने बताया कि उत्तरी काकेशस क्षेत्र में अदिगिया गणराज्य के मायकोप शहर स्थित एक सैन्य हवाई अड्डे को भी निशाना (Ukraine Russia War) बनाया गया। इससे रूस की वायु सैन्य गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
क्यों अहम हैं ये हमले?
जैसे-जैसे युद्ध चौथे साल की ओर बढ़ रहा है और कूटनीतिक कोशिशें ठंडी पड़ती दिख रही हैं, दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा ढांचे पर प्रहार तेज कर रहे हैं। यूक्रेन का साफ उद्देश्य रूस की तेल-गैस से होने वाली कमाई को कमजोर करना है—क्योंकि यही राजस्व युद्ध मशीनरी को ईंधन देता है।
इन हमलों ने यह भी साफ कर दिया है कि युद्ध का दायरा अब केवल मोर्चे तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक गहराइयों तक पहुंच चुका है।





