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Home » VB-G-RAM-JI Mission Act  : मनरेगा का ‘द एंड’, 1 जुलाई से छत्तीसगढ़ के गांवों में शुरू होगा 125 दिनों की पक्की कमाई का नया दौर!

VB-G-RAM-JI Mission Act  : मनरेगा का ‘द एंड’, 1 जुलाई से छत्तीसगढ़ के गांवों में शुरू होगा 125 दिनों की पक्की कमाई का नया दौर!

By Newsdesk Admin
28/05/2026
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VB-G-RAM-JI Mission Act
VB-G-RAM-JI Mission Act

सीजी भास्कर, 28 मई : क्या आपने कभी सोचा है कि सालों से ग्रामीण अंचलों की रीढ़ रही ‘मनरेगा’ योजना (VB-G-RAM-JI Mission Act) अचानक इतिहास के पन्नों में दफन होने जा रही है? जी हाँ, देश के गांवों की पूरी व्यवस्था को बदलने और मजदूरों को आर्थिक रूप से पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक और मजबूत बनाने के लिए सरकार एक ऐसा कानून लेकर आ रही है, जो ग्रामीण विकास के सारे पुराने ढर्रों को पूरी तरह से ध्वस्त कर देगा। छत्तीसगढ़ के गांवों और मजबूर हाथों के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी और धमाकेदार खुशखबरी है।

Contents
  • भूल जाइए 100 दिनों का पुराना रोना
  • सीधे खाते में आएगा पैसा
  • कार्यस्थलों पर मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं
  • ग्राम सभाएं खुद तय करेंगी अपने गांव का भाग्य
  • पुराने कामों को समेटने में जुटा प्रशासन

आगामी 1 जुलाई 2026 से पूरे सूबे में ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025’ को लागू करने का अंतिम काउंटडाउन शुरू हो चुका है। सरकार का यह नया दांव केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण छत्तीसगढ़ के श्रम बाजार में एक बड़ा सस्पेंस और हलचल पैदा कर दी है कि आखिर इस बड़े बदलाव से जमीनी स्तर पर क्या-क्या पलटने वाला है।

इस क्रांतिकारी कानून के आने की आहट के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। बलरामपुर जिले में इस महत्वाकांक्षी कानून को जमीन पर उतारने के लिए कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के कड़े मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर के आक्रामक नेतृत्व में युद्ध स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान छेड़ दिया गया है। यह अभियान गांवों के उस आखिरी मजदूर तक पहुँचने के लिए है, जो अब तक केवल 100 दिनों के सीमित रोजगार के भरोसे अपनी जिंदगी काट रहा था। सरकार की इस नई और चौंकाने वाली पहल का सीधा संदेश है कि अब गांवों में सुस्ती का माहौल नहीं चलेगा। इस नए कानून और क्रांतिकारी माडल (VB-G-RAM-JI Mission Act) के लागू होते ही ग्रामीण विकास की पूरी मशीनरी को नए तेवर और कड़े अनुशासन के साथ काम करना होगा।

भूल जाइए 100 दिनों का पुराना रोना

अब तक देश में ग्रामीण रोजगार का मतलब सिर्फ मनरेगा ही समझा जाता था, जहाँ साल भर में केवल 100 दिनों के काम की गारंटी मिलती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार इस पुरानी व्यवस्था का अंत कर नया कानून ला रही है, जिसके तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष के भीतर पूरे 125 दिनों के वैधानिक और गारंटीड रोजगार की पक्की सुरक्षा मिलेगी। यानी सीधे-सीधे पूरे 25 दिन अधिक की कमाई! सरकार का मुख्य फोकस अब सिर्फ गड्ढे खुदवाना या केवल मजदूरी बांटना नहीं है, बल्कि गांवों की सूरत को बुनियादी तौर पर बदलना है।

इस नए और आधुनिक माडल (VB-G-RAM-JI Mission Act) का असली मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी स्थाई संपत्तियों का निर्माण करना है जो सालों-साल टिकी रहें। इसमें जल संरक्षण के बड़े ढांचे, गांवों की पक्की अधोसंरचना का विकास, आजीविका को मजबूत करने वाले संसाधन और जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने की क्षमता को बढ़ाना शामिल है। यह बदलाव उन रसूखदारों और बिचौलियों के गाल पर एक करारा तमाशा है, जो अब तक ग्रामीण योजनाओं के फंड में सेंध लगाते थे। अब हर मजदूर को उसकी मेहनत का पूरा हक और ज्यादा दिनों का रोजगार मिलना पूरी तरह से तय हो चुका है।

’ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार- 1 जुलाई से लागू होगा वीबी-जी-राम-जी मिशन, अब मिलेगा 125 दिनों का गारंटीड रोजगार’

सीधे खाते में आएगा पैसा

इस नई योजना के नियम इतने सख्त और आक्रामक हैं कि लापरवाह अफसरों की रातों की नींद उड़ने वाली है। कोई भी पात्र ग्रामीण परिवार अपनी ही ग्राम पंचायत के माध्यम से सीधे रोजगार के लिए आवेदन कर सकेगा। यहाँ सबसे बड़ा सस्पेंस और कड़ा नियम यह है कि आवेदन जमा होने के ठीक 15 दिनों के भीतर प्रशासन को हर हाल में मजदूर को काम देना ही होगा। यदि स्थानीय प्रशासन निर्धारित 15 दिनों की समयावधि में रोजगार उपलब्ध कराने में नाकाम रहता है, तहाँ नियमों के मुताबिक पात्र हितग्राही को घर बैठे बकायदा ‘बेरोजगारी भत्ता’ देना अनिवार्य कर दिया गया है।

भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के पुराने खेल को जड़ से मिटाने के लिए पारदर्शिता का एक ऐसा फुलप्रूफ सिस्टम बनाया गया है, जिसे भेद पाना नामुमकिन है। श्रमिकों की मजदूरी का एक-एक रुपया बिना किसी बिचौलिए के ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ यानी डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक या डाकघर खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके अलावा, इस नए प्रगतिशील माडल (VB-G-RAM-JI Mission Act) में महिला श्रमिकों की भागीदारी को शीर्ष स्तर पर ले जाने के लिए विशेष नीतिगत और कानूनी प्रावधान किए गए हैं, ताकि गांवों की महिलाएं भी आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकें।

कार्यस्थलों पर मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं

अक्सर देखा जाता था कि चिलचिलाती धूप और बदतर हालातों में मजदूर खेतों और तालाबों के किनारे काम करने को मजबूर होते थे, जहाँ उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा का कोई पुरसाहाल नहीं होता था। लेकिन अब मजदूरों के इस मानवीय पहलू और उनके अधिकारों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि वीबी-जी-राम-जी मिशन के तहत जितने भी कार्यस्थल बनाए जाएंगे, वहां श्रमिकों के लिए स्वच्छ पेयजल, धूप से बचने के लिए पक्की छाया, प्राथमिक उपचार किट और सबसे महत्वपूर्ण—छोटे बच्चों की देखभाल के लिए ‘क्रेश’ (शिशुगृह) की सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहेगी।

इसका मतलब यह है कि अब ग्रामीण महिलाएं अपने छोटे बच्चों की सुरक्षा और देखभाल की चिंता किए बिना बेखौफ होकर काम पर आ सकेंगी। कार्यस्थलों का यह बदला हुआ मानवीय माडल (VB-G-RAM-JI Mission Act) ग्रामीण श्रम के क्षेत्र में एक बड़ा सम्मान लेकर आ रहा है। यहाँ मजदूरों को सिर्फ एक कामगार नहीं, बल्कि देश के विकास का एक सम्मानित हिस्सा माना गया है, जिनकी सहूलियत और गरिमा का ध्यान रखना अब हर एक सरकारी अधिकारी की पहली जिम्मेदारी होगी।

ग्राम सभाएं खुद तय करेंगी अपने गांव का भाग्य

इस नए कानून की सबसे बड़ी ताकत इसकी लोकतांत्रिक व्यवस्था है। अब रायपुर या दिल्ली के वातानुकूलित कमरों में बैठकर गांवों के विकास का नक्शा नहीं खींचा जाएगा। ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ के तहत स्थानीय ग्राम सभाओं की खुली बैठक में ग्रामीणों की आपसी सहमति से ही उनकी जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। इस मिशन के तहत जल संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण, पशुपालन और मत्स्य विकास के इन्फ्रास्ट्रक्चर को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

इसके साथ ही गांवों में आधुनिक आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण, आपदा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम और जलवायु अनुकूल (इको-फ्रेंडली) कार्यों को तेजी से मंजूरी दी जाएगी। स्थानीय स्तर पर फैसले लेने का यह विकेंद्रीकृत माडल (VB-G-RAM-JI Mission Act) गांवों को अपनी तकदीर खुद लिखने की पूरी आजादी देता है। जहाँ पहले अफसर अपनी मर्जी का काम थोप देते थे, तहां अब ग्रामीण खुद तय करेंगे कि उनके गांव की भलाई किस काम में है।

पुराने कामों को समेटने में जुटा प्रशासन

कलेक्टर के सख्त और आक्रामक निर्देशों के बाद पूरे बलरामपुर जिले में हड़कंप मचा हुआ है। वर्तमान में चल रहे मनरेगा के सभी पुराने और स्वीकृत कार्यों को बिजली की रफ्तार से निपटाया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सभी जनपद पंचायतों को आगामी 15 जून 2026 तक हर हाल में पुराने कार्यों को पूर्ण करने की अंतिम डेडलाइन (समय-सीमा) थमा दी है। अफसरों को साफ चेतावनी दी गई है कि यदि इस तारीख तक काम अधूरे मिले, तहाँ उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस कड़ाई के पीछे एक बहुत ही सोची-समझी और वैज्ञानिक रणनीति है। प्रशासन का लक्ष्य है कि मानसून के आगमन से पहले ही सारे अधूरे निर्माण कार्य हर हाल में पूरे कर लिए जाएं, ताकि जैसे ही बारिश का मौसम शुरू हो, तहाँ बिना कोई समय गंवाए सीधे बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और जल संरक्षण के नए कार्यों को मैदान पर उतारा जा सके। इस सुव्यवस्थित माडल (VB-G-RAM-JI Mission Act) से सरकारी पैसे और समय दोनों की भारी बचत होगी। जिला प्रशासन ने अब छत्तीसगढ़ के तमाम ग्रामीणों से अपील की है कि वे इस नई और युगगामी योजना की हर एक बारीकी को समझें, शिविरों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और आजीविका के इस नए महाअभियान का पूरा फायदा उठाकर अपने जीवन को समृद्ध बनाएं।

 

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