सीजी भास्कर, 29 मई : क्या छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का सबसे प्रसिद्ध और खूबसूरत कोना ‘तेलीबांधा तालाब’ अब एक नए और बड़े सियासी अखाड़े (Veer Savarkar Statue Dispute Raipur) में तब्दील होने जा रहा है? देश के राष्ट्रभक्तों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के इतिहास को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच एक बार फिर एक बेहद आक्रामक और वैचारिक जंग छिड़ गई है। तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) के किनारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर की एक भव्य प्रतिमा स्थापित करने के नए प्रस्ताव ने सूबे की राजनीति में भारी खलबली मचा दी है। सावरकर स्मृति संस्था की ओर से नगर निगम को सौंपे गए एक आवेदन के बाद से ही दोनों प्रमुख दल आमने-सामने आ गए हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस ने जहां इसे छत्तीसगढ़ के स्थानीय महापुरुषों की उपेक्षा और अपमान बताया है, तहां भाजपा और सावरकर समर्थक इस मांग को लेकर आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं।
इस नए विवाद (Veer Savarkar Statue Dispute Raipur) के लाइव होते ही रायपुर के राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस गहरा गया है कि क्या नगर निगम इस विवादित प्रस्ताव को मंजूरी देगा? कांग्रेस ने इस कदम को छत्तीसगढ़िया अस्मिता से जोड़कर बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है, जबकि सावरकर स्मृति मंच इस प्रतिमा के जरिए शहर को एक नया टूरिस्ट अट्रैक्शन (पर्यटन केंद्र) देने का दावा कर रहा है। दोनों पक्षों के आक्रामक बयानों ने रायपुर नगर निगम की आगामी बैठकों से पहले ही माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है।
छत्तीसगढ़ के महापुरुषों का अपमान बर्दाश्त नहीं
इस पूरे मामले पर सबसे पहला और तीखा हमला बोलते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा की नीतियों और राष्ट्रवाद पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने इस प्रस्ताव को लेकर तंज कसते हुए मीडिया से कहा कि क्या भाजपा अब तेलीबांधा तालाब का ऐतिहासिक नाम बदलकर सावरकर के नाम पर रखना चाहती है? यह पूरी तरह से छत्तीसगढ़ के स्थानीय महापुरुषों और हमारी संस्कृति का घोर अपमान है। इस पावन धरती पर माता कर्मा और तेलहीन माई जैसी महान विभूतियों के नाम को सबसे पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए।”
इतना ही नहीं, दीपक बैज ने इतिहास के पन्नों का हवाला देते हुए सावरकर पर एक बेहद आक्रामक और सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई के दौरान अंग्रेजों के सामने हाथ जोड़े और उनसे बार-बार माफी मांगी, आज भाजपा उनकी मूर्ति लगाने के लिए इतनी उतावली क्यों हो रही है? कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान ने भाजपा के खेमे में भारी नाराजगी पैदा कर दी है और इसे सावरकर के बलिदान का अपमान बताया जा रहा है।
लाइट शो और टूरिस्ट अट्रैक्शन बनाने का है प्लान
दूसरी तरफ, इस पूरे प्रस्ताव को लेकर सावरकर स्मृति मंच के संयोजक इंजीनियर गिरधारी ने अपनी रणनीति पूरी तरह साफ कर दी है। संस्था के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर की महापौर मीनल चौबे और संस्कृति विभाग के अध्यक्ष अमर गिदवानी से मुलाकात कर उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। संस्था का कहना है कि जब राजधानी रायपुर में देश के अलग-अलग विचारधाराओं के महापुरुषों की प्रतिमाएं पहले से ही स्थापित हैं, तहां अखंड भारत का सपना देखने वाले वीर सावरकर की प्रतिमा लगाने में किसी को क्या आपत्ति हो सकती है?
इंजीनियर गिरधारी के मुताबिक, प्रतिमा स्थापना के लिए तेलीबांधा तालाब का चयन बहुत सोच-समझकर किया गया है, क्योंकि यह शहर का सबसे जीवंत केंद्र है जहाँ हर दिन हजारों की संख्या में युवा और परिवार घूमने और अपना समय बिताने पहुंचते हैं। सावरकर समर्थकों ने एक और बड़ा और आकर्षक प्रस्ताव देते हुए कहा कि यदि इस प्रतिमा के साथ एक भव्य ‘लाइट एंड साउंड शो’ शुरू किया जाता है, तो यह स्थान देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक बहुत बड़ा केंद्र बन जाएगा, जिससे लोग सावरकर के जीवन संघर्ष से भी रूबरू हो सकेंगे।
82 मीटर ऊंचे तिरंगे के पास लगाने की तैयारी
तकनीकी और प्रशासनिक तौर पर देखा जाए तो यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है। जानकारी के मुताबिक, प्रतिमा लगाने के इस आवेदन को सबसे पहले मेयर-इन-काउंसिल (MIC) की आगामी बैठक में एजेंडे के तौर पर शामिल किया जाएगा। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद इस प्रस्ताव को अंतिम और कड़े फैसले के लिए रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा (जनरल बॉडी) में पेश किया जाएगा, जहाँ भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों के बीच इस पर भारी बहस होना तय माना जा रहा है।
आपको बता दें कि तेलीबांधा तालाब केवल एक जल निकाय नहीं है, बल्कि यह रायपुर का सबसे प्रमुख पर्यटन, खान-पान और मनोरंजन का शानदार प्लेटफार्म माना जाता है। इस मरीन ड्राइव पर पहले से ही देश का बेहद गौरवशाली और 82 मीटर ऊंचा विशालकाय राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ स्थापित है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। अब इसी गौरवशाली स्थल पर सावरकर की प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ यह नया विवाद (Veer Savarkar Statue Dispute Raipur) आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति को किस नई दिशा में लेकर जाएगा, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।




