सीजी भास्कर, 13 जून : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा विष्णु भोग चावल (Vishnu Bhog Rice) की सार्वजनिक सराहना का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री ने गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले के इस पारंपरिक सुगंधित चावल की तारीफ की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को देखकर रायपुर से ग्राहक सीधे जिले पहुंचे और 50 किलो विष्णु भोग चावल की खरीदी की।
सोशल मीडिया वीडियो से बढ़ी दिलचस्पी
मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत निमधा में आयोजित जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्थानीय किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा उत्पादित विष्णु भोग चावल (Vishnu Bhog Rice) की गुणवत्ता और सुगंध की सराहना की थी।
मुख्यमंत्री के संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसी वीडियो को देखकर रायपुर निवासी अजय कुमार और उनके साथी इस चावल की विशेषताओं से प्रभावित हुए और इसकी वास्तविक गुणवत्ता जानने के लिए सीधे गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही पहुंच गए।
7 हजार रुपये में खरीदा 50 किलो चावल
जिले पहुंचने के बाद ग्राहकों ने कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन की उपस्थिति में तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से सीधे 50 किलोग्राम विष्णु भोग चावल (Vishnu Bhog Rice) खरीदा। इस खरीदी की कुल कीमत लगभग 7 हजार रुपये रही। ग्राहकों ने बताया कि मुख्यमंत्री की तारीफ सुनने के बाद उनकी रुचि इस चावल में बढ़ी और वे इसकी सुगंध तथा स्वाद का अनुभव करना चाहते थे। उन्होंने भविष्य में भी नियमित खरीदी जारी रखने की इच्छा जताई।
महिला समूहों और किसानों को मिल रहा लाभ
तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की नीति का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। इससे किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और उत्पादक संगठनों को सीधे बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। साथ ही उनकी आय बढ़ाने के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।
कृषि समृद्धि का नया ब्रांड बन रहा विष्णु भोग
अपनी विशेष सुगंध, बेहतरीन स्वाद और उच्च गुणवत्ता के कारण विष्णु भोग चावल (Vishnu Bhog Rice) अब केवल एक स्थानीय फसल नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे जिले की कृषि समृद्धि, महिला उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों की पहचान के रूप में उभर रहा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह बाजार और प्रचार का समर्थन मिलता रहा तो यह पारंपरिक चावल राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना सकता है।




