सीजी भास्कर, 19 जुलाई। रायपुर में कम उम्र के बच्चों द्वारा दोपहिया और चारपहिया वाहन चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार पिछले डेढ़ वर्ष में सड़क दुर्घटनाओं में 28 नाबालिगों की मौत हुई है, जबकि 85 नाबालिग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इन आंकड़ों ने राजधानी में नाबालिगों की वाहन चलाने की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। (Raipur minor driving)
राजधानी के स्कूलों में केवल 12वीं कक्षा में ही लगभग 40 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। वहीं 10वीं और 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों को मिलाकर यह संख्या करीब 80 हजार तक पहुंचती है। इस तरह तीनों कक्षाओं में कुल लगभग 1.20 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। अनुमान है कि इनमें से बड़ी संख्या नियमित रूप से वाहन चलाती है, लेकिन अधिकांश के पास वैध लर्निंग लाइसेंस नहीं है।
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परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इन छात्रों में से केवल करीब 11 हजार ने ही लर्निंग लाइसेंस बनवाया है। अनुमान के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत नाबालिग बिना लाइसेंस के वाहन चला रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या गियर वाली बाइक और स्कूटर चलाने वाले किशोरों की है। इसके बावजूद ऐसे मामलों (Raipur minor driving) पर निगरानी और प्रभावी कार्रवाई का अभाव दिखाई देता है।
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शहर में कई नाबालिग तेज रफ्तार और महंगी बाइक के साथ कारें भी चलाते देखे जाते हैं। कई परिवार कम उम्र में ही बच्चों को वाहन सौंप देते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। इस स्थिति से निपटना पुलिस और परिवहन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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आरटीओ के अनुसार 15 जुलाई तक राज्य में बिना गियर वाले वाहनों के लिए 1,19,933 लर्निंग लाइसेंस जारी किए गए हैं। इनमें लगभग 32 हजार लाइसेंस 16 से 17 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को मिले हैं, जबकि शेष 18 वर्ष से अधिक आयु के आवेदकों के हैं। सबसे अधिक 21,695 लर्निंग लाइसेंस रायपुर में जारी हुए हैं। इसके अलावा बिलासपुर में 14,384, दुर्ग में 10,476 और रायगढ़ में 9,765 लर्निंग लाइसेंस जारी किए गए हैं।
यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लर्निंग लाइसेंस (Raipur minor driving) जारी करना पर्याप्त नहीं है। नए चालकों को सड़क सुरक्षा, हेलमेट के उपयोग, गति सीमा और यातायात नियमों का व्यवहारिक प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि रायपुर सहित बड़े शहरों में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग को संयुक्त रूप से विशेष जागरूकता अभियान चलाकर नाबालिगों की सुरक्षित ड्राइविंग सुनिश्चित करनी चाहिए।
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