सीजी भास्कर, 08 अप्रैल। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीट ‘भवानीपुर’ पर आज सियासी पारा अपने चरम (West Bengal Election High Profile Seat) पर पहुंच गया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कालीघाट की गलियों से पैदल निकलते हुए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। करीब 800 मीटर के इस पैदल मार्च में टीएमसी कार्यकर्ताओं का जो हुजूम दिखा, उसने साफ कर दिया कि ममता इस चुनाव को कितनी गंभीरता से ले रही हैं। नामांकन के बाद सीएम ने जनता से एक भावुक अपील करते हुए कहा कि भवानीपुर सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक तपस्या की जन्मभूमि है।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर भड़कीं ममता (West Bengal Election High Profile Seat)
पर्चा भरने के बाद ममता बनर्जी के तेवर तीखे नजर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जानबूझकर बड़ी संख्या में बंगाल के मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ बताया। ममता ने समर्थकों में जोश भरते हुए कहा, “सिर्फ भवानीपुर ही क्यों, इस बार लक्ष्य बंगाल की सभी 294 सीटें हैं। हर सीट पर मां, माटी और मानुष की जीत सुनिश्चित करनी होगी।”
मिनी इंडिया में ‘शक्ति युद्ध’
भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ देश के लगभग हर कोने के लोग बसते हैं। बंगाली हिंदुओं के साथ-साथ यहाँ गुजराती, पंजाबी और मुस्लिम वोटरों का बड़ा प्रभाव है। 2026 की यह लड़ाई इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यहाँ ममता के सामने उनके पुराने सिपहसालार और अब बीजेपी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी खड़े हैं। शुभेंदु ने पहले ही भारी तामझाम के साथ नामांकन भरकर ममता को सीधी चुनौती दी थी, जिसका जवाब आज ममता ने अपनी सादगी और पैदल मार्च से देने की कोशिश की है।
साख की लड़ाई और जातीय समीकरण
आंकड़ों के खेल में उलझी भवानीपुर सीट पर करीब 42% बंगाली हिंदू और 34% गैर-बंगाली हिंदू वोटर हैं, जबकि 24% मुस्लिम आबादी यहाँ किंगमेकर की भूमिका निभाती है। शुभेंदु अधिकारी जहाँ गैर-बंगाली और हिंदू मतों के ध्रुवीकरण पर भरोसा जता रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी अपनी पुरानी छवि और सर्वधर्म समभाव के कार्ड के साथ मैदान में हैं। अब देखना यह है कि भवानीपुर के मतदाता अपनी ‘दीदी’ पर भरोसा कायम रखते हैं या फिर शुभेंदु कोई बड़ा उलटफेर करते हैं।



