सीजी भास्कर, 10 जुलाई। Meta के इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के प्रस्तावित Username फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इस फीचर से साइबर अपराध और फर्जी पहचान (इम्पर्सोनेशन) की आशंका को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय ने Meta को नोटिस जारी किया था। (WhatsApp Username Feature)
अब सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने सरकार को अपना जवाब सौंप दिया है, जिसकी मंत्रालय द्वारा विस्तार से जांच की जा रही है।
साइबर अपराध और फर्जी पहचान की आशंका पर सरकार की पैनी नजर : WhatsApp Username Feature
सूत्रों के अनुसार, IT मंत्रालय को गुरुवार को WhatsApp का जवाब प्राप्त हो गया। मंत्रालय अब यह परखेगा कि कंपनी की ओर से प्रस्तावित सुरक्षा उपाय IT अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। हालांकि, इस पूरे मामले पर Meta की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इससे पहले IT सचिव एस. कृष्णन ने बताया था कि WhatsApp से जवाब गुरुवार तक मांगा गया था। वहीं, Telegram और Signal को भेजे गए नोटिसों पर अभी जवाब का इंतजार है। नोटिस मिलने के बाद Meta की टीम ने IT मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर अपने पक्ष से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी दी थी।
WhatsApp ने सुरक्षा को लेकर क्या कहा?
WhatsApp का कहना है कि किसी भी यूजर को संदेश भेजने के लिए सामने वाले व्यक्ति का सही Username पता होना जरूरी होगा। कंपनी नए लोगों से संपर्क करने की सीमा तय करेगी, Username का अनुमान लगाने की कोशिशों पर रोक लगाएगी और फर्जी पहचान व दुरुपयोग जैसी गतिविधियों का पता लगाने के लिए विशेष सिस्टम लागू करेगी। साथ ही, किसी अनजान व्यक्ति के पहले संदेश से पहले यूजर को यह जानकारी भी दिखाई जाएगी कि संदेश भेजने वाला नया अकाउंट है, कॉन्टैक्ट है, किसी साझा ग्रुप का सदस्य है या किसी दूसरे देश से है।
सरकार ने नोटिस में क्या पूछा था? : WhatsApp Username Feature
सरकार ने Meta से स्पष्ट करने को कहा था कि ऐसा फीचर, जिससे साइबर अपराध बढ़ने की आशंका हो, उसे लागू करने पर IT अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही यह भी याद दिलाया गया कि एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया इंटरमीडियरी होने के नाते WhatsApp पर IT नियमों के अनुसार आवश्यक सावधानी (Due Diligence) बरतने की कानूनी जिम्मेदारी है।
अब सभी की नजर IT मंत्रालय की जांच और उसके अगले फैसले पर टिकी है, क्योंकि यह निर्णय WhatsApp के नए Username फीचर के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।



