सीजी भास्कर 29 जनवरी Wrong UPI Transfer Rules : आज के डिजिटल दौर में किराने से लेकर किराया तक, हर भुगतान UPI से हो रहा है। एक टैप, एक पिन—और पैसा पलभर में ट्रांसफर। लेकिन इसी रफ्तार में छोटी-सी चूक कई बार बड़ी चिंता बन जाती है, जब भुगतान गलत UPI ID या गलत अकाउंट में चला जाता है।
UPI सिस्टम की स्पीड ही क्यों बनती है परेशानी
UPI को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ट्रांजैक्शन रियल-टाइम में सेटल हो। स्क्रीन पर “Success” दिखते ही रकम भेजने वाले खाते से निकलकर रिसीवर के खाते में पहुंच चुकी होती है। यहां कूलिंग पीरियड या ऑटो-रिवर्सल जैसा कोई विकल्प नहीं होता—यही वजह है कि गलती के बाद वापसी आसान नहीं रहती।
गलत ट्रांसफर के बाद पहला जरूरी कदम क्या हो
अगर रकम गलत अकाउंट में चली गई है, तो घबराने के बजाय उसी UPI ऐप में जाएं, जिससे भुगतान किया गया था। वहां Dispute / Wrong Transfer का विकल्प चुनकर शिकायत दर्ज करें। पैसा तुरंत वापस नहीं आता, लेकिन शिकायत सिस्टम में रिकॉर्ड हो जाती है—यहीं से प्रक्रिया शुरू होती है।
बैंक क्या करता है, और सीमा कहां खत्म होती है
शिकायत दर्ज होते ही भेजने वाला बैंक, रिसीवर के बैंक से संपर्क करता है। रिसीवर को सूचित किया जाता है कि रकम गलती से उनके खाते में आई है और सहमति मांगी जाती है। अगर रिसीवर राज़ी हो जाए, तो कुछ दिनों में पैसा वापस आ सकता है।
लेकिन अगर रिसीवर मना कर दे, तो बैंक कानूनी तौर पर रकम जबरन नहीं काट सकता—भले ही गलती अनजाने में हुई हो।
पुलिस शिकायत से क्या मिलती है राहत
रिसीवर की असहमति की स्थिति में पुलिस में शिकायत की सलाह दी जाती है। हालांकि, यह रास्ता गारंटी नहीं देता। कई मामलों में सहमति मिलने पर ही समाधान निकलता है—यानी अंतिम फैसला अक्सर रिसीवर की इच्छा पर टिका होता है।
UPI की ‘कड़वी सच्चाई’ क्या है
UPI तेज है, सुविधाजनक है—पर नियम सख्त हैं। गलती के बाद सिस्टम अपने-आप पैसा वापस नहीं करता। वापसी तभी संभव है जब रिसीवर स्वेच्छा से रकम लौटाए। इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
भविष्य में गलती से कैसे बचें
पेमेंट से पहले रिसीवर का नाम, UPI ID, और राशि एक बार रुककर जरूर जांचें। QR स्कैन करते वक्त भी नाम मिलान करें—एक सेकंड की पुष्टि, बड़ी परेशानी से बचा सकती है।




