सीजी भास्कर, 08 जून। रायपुर की 12 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाली सुमना कुंडू ने अपने पीछे मानवता और सेवा की ऐसी मिसाल छोड़ी है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। गंभीर बीमारी से जूझ रही सुमना अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगदान ने दो जरूरतमंद लोगों को नया जीवन देकर उन्हें अमर बना दिया है। (12-year-old Sumana became the hope of two lives)
दो मरीजों को मिला नया जीवन : 12-year-old Sumana became the hope of two lives
सोटो छत्तीसगढ़ और एम्स रायपुर के समन्वय से सुमना की दोनों किडनियों का सफल प्रत्यारोपण किया गया। एक किडनी तीन वर्षों से डायलिसिस पर निर्भर 15 वर्षीय किशोर को और दूसरी पांच वर्षों से डायलिसिस का सामना कर रहे 45 वर्षीय व्यक्ति को प्रत्यारोपित की गई। दोनों प्रत्यारोपण सफल रहे हैं और मरीजों की सेहत में तेजी से सुधार देखा जा रहा है।
गंभीर बीमारी से जूझ रही थी सुमना
सुमना लंबे समय से पिक्नोडाइसोस्टोसिस और इंट्राक्रेनियल हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थी। वह लगातार जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी। 29 मई को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन 9 दिनों तक आईसीयू और वेंटिलेटर पर उपचार के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका।
परिवार ने लिया भावुक लेकिन प्रेरणादायक फैसला : 12-year-old Sumana became the hope of two lives
जब डॉक्टरों ने सुमना के परिवार को अंगदान की संभावना के बारे में बताया, तब परिवार ने साहसिक और प्रेरणादायक निर्णय लिया। परिवार का मानना था कि यदि उनकी बेटी के अंग किसी और के जीवन को बचा सकते हैं, तो इससे बड़ा पुण्य और कुछ नहीं हो सकता।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम विदाई
मानवता के इस असाधारण योगदान के सम्मान में सुमना कुंडू को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। सुमना भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके अंगदान से मिली नई जिंदगी दो परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई है।



