सीजी भास्कर, 19 अप्रैल : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों (Hormuz Strait Crisis) में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर तनाव की जद में आ गया है। महज 24 घंटे के भीतर हालात ऐसे बदले कि पहले इसे खोलने का ऐलान हुआ और फिर अचानक दोबारा बंद कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
दरअसल, ईरान ने शुरुआत में जलडमरूमध्य (Hormuz Strait Crisis) को खोलने की घोषणा की थी, जिसके बाद वैश्विक बाजारों में राहत के संकेत देखने को मिले। कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट आई और निवेशकों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में तनाव कम होगा। लेकिन इस फैसले के बाद संचालन और शर्तों को लेकर स्पष्टता नहीं होने से भ्रम की स्थिति बन गई, जिससे बाजार फिर अस्थिर हो गया।
हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों (Hormuz Strait Crisis) पर अपना दबाव और निगरानी जारी रखने का संकेत दिया। इसे ईरान ने उकसावे के रूप में लिया और कड़ा रुख अपनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया। ईरान ने चेतावनी भी दी है कि इस क्षेत्र में आने-जाने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे समुद्री व्यापार पर खतरा और बढ़ गया है।
तनाव के बीच समुद्री क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। ओमान के नजदीक जहाजों पर फायरिंग की घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग का बंद होना सीधे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव लंबा खिंचता है, तो तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। फिलहाल, हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हैं कि आगे स्थिति किस दिशा में जाती है।


