सीजी भास्कर, 19 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहां एक मासूम बच्चे को उसकी मातृभाषा के कारण स्कूल में प्रवेश देने से मना कर दिया गया। इस मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे गंभीर (Right to Education Violation) माना है। कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर हुई त्वरित जांच के बाद दोषी स्कूल पर न केवल भारी जुर्माना लगाया गया, बल्कि उसके संचालन पर भी रोक लगा दी गई है।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद चोपड़ापारा स्थित ‘स्वरंग किड्स एकेडमी’ (पेशागी एजूकेशन सोसायटी) से जुड़ा है। यहां एक 4 वर्षीय बच्चे के परिजनों ने दाखिले के लिए आवेदन किया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उसे प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया। स्कूल का तर्क था कि बच्चा केवल स्थानीय ‘सरगुजिहा’ भाषा बोलता है और उसे हिंदी नहीं आती। प्रबंधन ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उनके यहां “बड़े घरों के बच्चे” पढ़ते हैं और शिक्षक बच्चे की भाषा नहीं समझ पाएंगे। इस भेदभावपूर्ण व्यवहार को प्रशासन ने शिक्षा के बुनियादी सिद्धांतों और (Right to Education Violation) के रूप में देखा।
जांच में खुले कई चौंकाने वाले राज
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार झा की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उन प्रावधानों के खिलाफ है जो मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देते हैं। जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि यह स्कूल बिना किसी आधिकारिक विभागीय मान्यता के अवैध रूप से संचालित हो रहा था। बिना मान्यता स्कूल चलाना और भाषा के आधार पर भेदभाव करना सीधे तौर पर (Right to Education Violation) की श्रेणी में आता है।
जुर्माना और स्कूल बंद
वरिष्ठ प्राचार्य रूमी घोष की अध्यक्षता वाली जांच टीम द्वारा पुष्टि किए जाने के बाद, स्कूल प्रबंधन ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। नियमों के उल्लंघन के चलते स्वरंग किड्स एकेडमी पर 1 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। प्रशासन ने इसे (Right to Education Violation) का स्पष्ट उदाहरण मानते हुए संस्था का संचालन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है।
छात्रों के भविष्य की चिंता
स्कूल बंद होने की स्थिति में वहां पढ़ रहे अन्य बच्चों का भविष्य अधर में न लटके, इसके लिए भी प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल के सभी बच्चों का दाखिला पास के अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कराया जाए। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि जुर्माना राशि शासन के खजाने में जमा की जाएगी और शिक्षा के अधिकार के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी संस्था को बख्शा नहीं जाएगा।


