सीजी भास्कर, 19 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में निजी स्कूलों (School Monopolistic Practices Investigation) द्वारा अभिभावकों पर बनाए जा रहे अनुचित दबाव के खिलाफ प्रशासन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। लंबे समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि निजी स्कूल प्रबंधन पालकों को खास दुकानों से ही किताबें, कॉपियां, ड्रेस और अन्य शैक्षणिक सामग्रियां खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने एक उच्च स्तरीय शुरू करने का निर्णय लिया है।
सर्व पालक समिति की शिकायत पर एक्शन
दुर्ग जिले में सक्रिय ‘सर्व पालक समिति’ ने इस विषय में एक विस्तृत शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष पेश की थी। समिति का आरोप है कि कई बड़े स्कूल प्रबंधन की साठगांठ स्थानीय दुकानदारों के साथ है, जिसकी वजह से अभिभावकों को बाजार दर से महंगे दामों पर सामान खरीदना पड़ता है। इस (School Monopolistic Practices Investigation) के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि शिक्षा का अधिकार और उपभोक्ता हितों का हनन न हो।
प्राचार्य जेपी शर्मा के नेतृत्व में टीम तैयार
शिकायत की गंभीरता को समझते हुए विभाग ने पांच सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया है। इस टीम का नेतृत्व पाहंदा हाईस्कूल के वरिष्ठ प्राचार्य जेपी शर्मा करेंगे। इस (School Monopolistic Practices Investigation) टीम का मुख्य कार्य उन स्कूलों की पहचान करना है जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अभिभावकों पर दबाव बनाया है।
कैसे होगी जांच की प्रक्रिया
शिकायतकर्ताओं का पक्ष : टीम सबसे पहले उन पालकों और समिति के सदस्यों से मुलाकात करेगी जिन्होंने शिकायत दर्ज कराई है।
स्कूल प्रबंधन से जवाब-तलब : जिन स्कूलों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलेंगे, उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
दुकानों का निरीक्षण : क्या वाकई में सामग्री केवल चिन्हित दुकानों पर ही मिल रही है, इसकी भी जमीनी हकीकत परखी जाएगी।
अभिभावकों को राहत की उम्मीद
नए शिक्षण सत्र की शुरुआत में इस तरह की कार्रवाई से पालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। आमतौर पर देखा जाता है कि स्कूलों द्वारा तय दुकानों पर सामान की कीमतें सामान्य बाजार से 20% से 40% तक अधिक होती हैं। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित स्कूलों पर भारी जुर्माना और उनकी मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।


