सीजी भास्कर 20 अप्रैल
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम सर्वसम्मति से पारित होने के बावजूद अब तक लागू नहीं किया गया, जिससे साफ है कि इसे जानबूझकर लंबित रखा गया है।
बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया संशोधन वास्तविक महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि इसे परिसीमन (Delimitation) से जोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2023 में पारित विधेयक में स्पष्ट उल्लेख था कि पहले जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया होगी, लेकिन अब तक जनगणना ही नहीं कराई गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जिस बिल का श्रेय भाजपा ले रही है, वह सितंबर 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका था। उन्होंने कहा कि वर्तमान संशोधन के जरिए भाजपा परिसीमन का मुद्दा थोपना चाहती है, जिससे SC, ST और OBC वर्ग के आरक्षण और प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
बघेल ने सवाल उठाया कि जब बिहार जैसे राज्यों में विशेष सर्वेक्षण (SIR) कराया जा सकता है, तो देश में जनगणना कराने में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे महिलाओं और छोटे राज्यों के अधिकारों को सीमित करने की मंशा है। उनका कहना था कि परिसीमन के बाद बड़े राज्यों को अधिक फायदा होगा, जबकि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर भी सवाल उठाए और कहा कि चुनाव के बीच ऐसा संबोधन भाजपा के प्रचार जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने भाजपा, जनसंघ, RSS और विहिप पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन संगठनों ने कभी महिलाओं को नेतृत्व में आगे नहीं बढ़ाया।


