सीजी भास्कर, 21 अप्रैल : पश्चिम बंगाल की सियासत (Bengal Election Strategy) में इस बार मुकाबला सिर्फ नारों और रैलियों का नहीं, बल्कि रणनीति और गणित का बन गया है। भारतीय जनता पार्टी ने 2026 के चुनाव को देखते हुए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी अब आक्रामक बयानबाजी से दूर रहकर बूथ स्तर पर फोकस कर रही है। यह नई चुनावी रणनीति 2021 की तुलना में ज्यादा सुनियोजित और शांत तरीके से लागू की जा रही है।
2021 के विधानसभा चुनाव में BJP का प्रचार काफी हद तक व्यक्तिगत हमलों पर केंद्रित हो गया था, जिसका फायदा ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को मिला। ‘दीदी ओ दीदी’ जैसे नारों को ममता बनर्जी ने अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किया और अंततः चुनाव परिणाम BJP के खिलाफ गए। इस अनुभव के बाद अब पार्टी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए चुनावी गणित (Bengal Election Strategy) को प्राथमिकता दी है।
बूथ स्तर पर फोकस, हर वोट की अहमियत
BJP की नई रणनीति का सबसे अहम हिस्सा बूथ मैनेजमेंट है। राज्य में 294 विधानसभा सीटें हैं और हर सीट पर औसतन 250-300 बूथ होते हैं। अधिकांश सीटों का फैसला 1,500 से 5,000 वोटों के अंतर से होता है। ऐसे में पार्टी हर बूथ पर 10-15 अतिरिक्त वोट जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। यह बूथ मैनेजमेंट मॉडल (Bengal Election Strategy) चुनावी परिणामों को प्रभावित करने में निर्णायक साबित हो सकता है।
पार्टी की ‘पन्ना प्रमुख’ प्रणाली के तहत हर कार्यकर्ता 50-60 मतदाताओं से संपर्क करता है। यदि हर बूथ पर 10 अतिरिक्त वोट जुड़ते हैं, तो एक विधानसभा सीट पर करीब 3,000 वोटों का फायदा हो सकता है। यही गणित BJP की चुनावी रणनीति (Bengal Election Strategy) का आधार बन गया है।
उम्मीदवार चयन में बदलाव
2021 के मुकाबले इस बार BJP ने टिकट वितरण में भी बड़ा बदलाव किया है। दलबदलुओं और बाहरी चेहरों को कम प्राथमिकता दी गई है, जबकि स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले उम्मीदवारों को आगे लाया गया है। इस रणनीति का मकसद जमीनी पकड़ मजबूत करना है। यह उम्मीदवार चयन नीति (Bengal Election Strategy) संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
अमित शाह का ‘वॉर रूम’ प्लान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस पूरी रणनीति की कमान संभाले हुए हैं। उन्होंने बंगाल में कई दिनों तक डेरा डालकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की है। पार्टी ने महेश शर्मा, सीपी जोशी और संजय भाटिया जैसे नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी है। यह केंद्रीकृत प्रबंधन रणनीति (Bengal Election Strategy) चुनावी अभियान को दिशा देने में अहम भूमिका निभा रही है।
मुद्दों में बदलाव, बयानबाजी से दूरी
इस बार BJP ने अपने चुनाव प्रचार का फोकस भी बदला है। व्यक्तिगत हमलों से दूरी बनाते हुए पार्टी अब भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं की खामियों को प्रमुख मुद्दा बना रही है। यह मुद्दा आधारित प्रचार (Bengal Election Strategy) मतदाताओं को सीधे प्रभावित करने की कोशिश है।
क्षेत्रवार अलग रणनीति
BJP ने बंगाल को कई हिस्सों में बांटकर अलग-अलग रणनीति तैयार की है। उत्तर बंगाल, जंगलमहल, सीमावर्ती जिले और दक्षिण बंगाल के लिए अलग-अलग फोकस तय किया गया है। हर क्षेत्र में सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाई गई है। यह क्षेत्रीय चुनावी प्लान (Bengal Election Strategy) पार्टी को अधिक सीटें दिलाने का आधार बन सकता है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि BJP की यह रणनीति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन चुनौतियां भी बड़ी हैं। अल्पसंख्यक वोटों का एकजुट होना, ममता बनर्जी की लोकप्रियता और ‘बाहरी पार्टी’ का टैग अभी भी BJP के सामने बड़ी बाधाएं हैं। इसके बावजूद पार्टी को उम्मीद है कि 3-5 प्रतिशत वोट स्विंग उसे 40-50 अतिरिक्त सीटें दिला सकता है। यह संभावित वोट बदलाव (Bengal Election Strategy) चुनाव का रुख बदल सकता है।


