सीजी भास्कर, 20 अप्रैल : लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद देश में Political Blame Game चरम पर पहुंच गया है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा शासित राज्यों में सियासी घमासान तेज है और कई राज्यों ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की होड़ मचा दी है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आगामी 30 अप्रैल को एक दिन का विशेष सत्र बुलाने का ऐलान कर दिया है, जिसे रविवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन ने मंजूरी दे दी। वहीं, मध्य प्रदेश में भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक दिवसीय सत्र बुलाने की बात कही है, जिसकी तारीख का ऐलान जल्द होने की उम्मीद है।
सदन में निंदा प्रस्ताव और सड़क पर संग्राम
इन विशेष सत्रों को बुलाने का मुख्य उद्देश्य संसद में बिल गिरने के लिए सीधे तौर पर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराना और उनके खिलाफ सदन के भीतर निंदा प्रस्ताव पारित करना है। भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को Political Blame Game के जरिए महिला विरोधी रवैये के रूप में पेश कर रही है। पार्टी का पूरा फोकस इस बात पर है कि राजनीति में महिलाओं के अधिकारों में देरी के लिए कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन को जनता की नजरों में दोषी साबित किया जाए। सत्र के माध्यम से भाजपा विपक्ष की आलोचना कर उन्हें विधायी स्तर पर घेरने की योजना बना रही है।
‘पब्लिक कैंपेन’ में बदलेगा मुद्दा
भाजपा केवल सदन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि इसे एक बड़े जन आंदोलन या पब्लिक कैंपेन में बदलने के मूड में है। इस Political Blame Game के तहत आने वाले दिनों में देश भर में सम्मेलन, रैली, पदयात्रा और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी। भाजपा का लक्ष्य जनता के बीच जाकर विपक्ष को बेनकाब करना और यह संदेश देना है कि विपक्षी दलों की वजह से ही महिलाओं को उनका संवैधानिक हक नहीं मिल पाया। मध्य प्रदेश में विधानसभा सत्र से पहले आज ‘महिला आधिकारिक मंच’ से इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जा रहा है।
131वें संविधान संशोधन पर छिड़ी रार
संसद में संविधान संशोधन विधेयक के गिरने को भाजपा ने एक नया राजनीतिक एंगल दे दिया है। सत्ता पक्ष का तर्क है कि विपक्ष ने जानबूझकर इस ऐतिहासिक सुधार में बाधा डाली है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अलावा अन्य भाजपा शासित राज्य भी इसी राह पर चलने की तैयारी कर रहे हैं। सदन के भीतर निंदा प्रस्ताव लाना और सड़क पर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाना, भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वह आगामी चुनावों से पहले महिला वोट बैंक को अपने पक्ष में लामबंद करना चाहती है।


