सीजी भास्कर 23 अप्रैल I बिलासपुर हाईकोर्ट ने कोरबा की पूर्व व निलंबित कलेक्टर रानू साहू से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उनके रिश्तेदारों की संपत्तियों को अटैच किए जाने के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। (High Court strict on Ranu Sahu case)
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई।
क्या है पूरा मामला : High Court strict on Ranu Sahu case
कोल लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रानू साहू के कई रिश्तेदारों की करोड़ों की संपत्ति अटैच की थी। इनमें तुषार साहू, पंकज कुमार साहू, पीयूष कुमार साहू, पूनम साहू, अरुण कुमार साहू सहित अन्य परिजनों की संपत्तियां शामिल हैं।सभी ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर यह तर्क दिया था कि—
संपत्ति कलेक्टर बनने से पहले खरीदी गई थी
उनका नाम FIR में नहीं है
अपीलेट ट्रिब्यूनल द्वारा अपील खारिज करना गलत है
कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि :-
जुर्म से पहले खरीदी गई संपत्ति भी सुरक्षित नहीं मानी जाएगी
Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत “जुर्म से हुई कमाई” की परिभाषा व्यापक है
यदि असली अवैध कमाई का पता नहीं चलता, तो बराबर कीमत की दूसरी संपत्ति भी अटैच की जा सकती है
सबूत पर भी बड़ी टिप्पणी I (High Court strict on Ranu Sahu case)
ऐसी अटैचमेंट का मकसद अपराधियों को जुर्म से होने वाले आर्थिक फ़ायदों को अपने पास रखने से रोकना है। एनफोर्समेंट अथॉरिटी के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह सीधे सबूतों से यह साबित करे कि जिस प्रॉपर्टी की बात हो रही है, वह क्राइम से हुई कमाई है।
मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में काम करने का तरीका अक्सर घुमावदार और साफ न दिखने वाले फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन से जुड़ा होता है, जिससे सीधे सबूत मिलना मुश्किल हो जाता है। इसके साथ कोर्ट ने सभी याचिका को खारिज कर दिया है।


