सीजी भास्कर, 25 अप्रैल : छत्तीसगढ़ सरकार की कृषि कल्याणकारी योजनाएं अब किसानों की जिंदगी में खुशहाली का नया रंग भर रही हैं। मुंगेली जिले के एक प्रगतिशील किसान गोविंद जायसवाल ने एक्सटेंशन रिफॉर्म (आत्मा) योजना को अपनाकर यह साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक और सरकारी मार्गदर्शन मिले, तो खेती से शानदार कमाई की जा सकती है। इस खबर (Chhattisgarh Agriculture News) के अनुसार, गोविंद ने पारंपरिक खेती के बजाय उन्नत विधियों को अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
निःशुल्क बीज और उन्नत तकनीक का मेल
रबी सीजन 2025-26 गोविंद के लिए बदलाव का साल साबित हुआ। आत्मा योजना के अंतर्गत उन्हें सरसों की उन्नत किस्म पी.एम.-32 का बीज एक एकड़ खेत के लिए पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया गया। लेकिन यह सफलता सिर्फ बीज तक सीमित नहीं थी। इस योजना (Chhattisgarh Agriculture News) के तहत उनके गांव में ‘कृषक खेत पाठशाला’ का आयोजन किया गया, जहां गोविंद ने खेती की बारीकियों को समझा। उन्हें बताया गया कि कैसे वैज्ञानिक तरीके से कम लागत में अधिक पैदावार ली जा सकती है।
पाठशाला से सीखा कीट प्रबंधन का गुर
गोविंद जायसवाल ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान उन्हें बीज उपचार और खरपतवार प्रबंधन की आधुनिक जानकारी दी गई। सरसों की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाने वाले ‘एफिड’ कीट से बचाव के लिए उन्हें विशेष तकनीकी सलाह मिली। कृषि विभाग ने इस मामले (Chhattisgarh Agriculture News) में संवेदनशीलता दिखाते हुए फफूंदनाशक और कीटनाशक दवाइयां भी बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराईं। सही समय पर सही दवा और सही सलाह ने फसल की सुरक्षा सुनिश्चित की।
25 हजार का शुद्ध लाभ और बंपर पैदावार
सरकारी मार्गदर्शन और उन्नत तकनीकों के सटीक इस्तेमाल का नतीजा यह रहा कि गोविंद को प्रति एकड़ लगभग 06 क्विंटल सरसों की पैदावार हासिल हुई। लागत में भारी कमी और उत्पादन में हुई इस वृद्धि के कारण उन्हें करीब 25 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हुआ है। इस जानकारी (Chhattisgarh Agriculture News) के सामने आने के बाद क्षेत्र के अन्य किसान भी अब आत्मा योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
कृषि विभाग का जताया आभार
अपनी इस सफलता से उत्साहित गोविंद जायसवाल ने कृषि विभाग और आत्मा योजना के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पहले वे खेती में लगने वाली लागत को लेकर चिंतित रहते थे, लेकिन अब विभागीय सहयोग ने उनकी खेती को लाभकारी बना दिया है। निश्चित रूप से, मुंगेली के गोविंद की यह कहानी इस घटना (Chhattisgarh Agriculture News) के रूप में अन्य कृषकों के लिए एक मिसाल है कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर किसान कैसे आत्मनिर्भर बन सकते हैं।


