सीजी भास्कर, 27 अप्रैल : छत्तीसगढ़ की राजनीति और कानूनी गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां कांकेर लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद भोजराज नाग को हाईकोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। चुनाव परिणामों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उसे सिरे से खारिज कर दिया, जिससे वर्तमान सांसद की जीत पर मंडरा रहे संकट के बादल फिलहाल छंट गए हैं। यहां यह स्पष्ट हो गया है कि बिना किसी ठोस आधार के चुनावी जीत को चुनौती देना अब आसान नहीं होगा और यह (CG High Court Decision Bhojraj Nag) प्रदेश की सियासी हलचल के बीच एक नजीर की तरह देखा जा रहा है।
EVM में छेड़छाड़ के आरोपों पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
यह याचिका कांकेर से मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे बीरेश ठाकुर द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने अपनी अर्जी में गंभीर आरोप लगाए थे कि चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में गड़बड़ी और छेड़छाड़ की गई, जिसका सीधा असर अंतिम परिणामों पर पड़ा। याचिकाकर्ता ने बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों के पुन: सत्यापन की मांग की थी। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने साफ लहजे में कहा कि केवल मौखिक आरोपों के आधार पर जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता। जहां तक कानूनी प्रक्रिया का सवाल है, रिकॉर्ड पर दस्तावेजी सबूत होना अनिवार्य है, जिसके अभाव में यह (CG High Court Decision Bhojraj Nag) भोजराज नाग के पक्ष में गया।
इन विधानसभा क्षेत्रों के डेटा पर उठाए गए थे सवाल
बीरेश ठाकुर ने अपनी याचिका में विशेष रूप से पांच विधानसभा क्षेत्रों के पोलिंग डेटा में विसंगति होने का दावा किया था। इनमें गुंडरदेही (61), सिहावा (56), संजारी बालोद (59), डोंडी लोहारा (60) और केशकाल (82) जैसे क्षेत्र शामिल थे। उनका आरोप था कि इन क्षेत्रों में फॉर्म 17C में दर्ज मशीन नंबरों और वीवीपैट यूनिट के नंबरों में अंतर पाया गया है। हालांकि, जब यह मामला सुनवाई के लिए बेंच के सामने पहुंचा, तो कोर्ट ने इन दावों को प्रारंभिक स्तर पर पर्याप्त नहीं माना। इस (CG High Court Decision Bhojraj Nag) के बाद अब विपक्षी खेमे को नए सिरे से सबूत जुटाने की चुनौती मिल गई है।
कानूनी दरवाजा अभी भी खुला, पर सबूतों की शर्त बरकरार
भले ही वर्तमान याचिका खारिज कर दी गई हो, लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता के लिए एक उम्मीद की खिड़की खुली रखी है। फैसले में स्पष्ट किया गया है कि यदि भविष्य में गड़बड़ी के कोई पुख्ता और ‘दस्तावेजी’ सबूत मिलते हैं, तो नई याचिका दायर की जा सकती है। इसका मतलब है कि सांसद भोजराज नाग के लिए यह राहत स्थाई नहीं कही जा सकती, लेकिन वर्तमान में उनकी स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह (CG High Court Decision Bhojraj Nag) चुनाव आयोग की पारदर्शिता और ईवीएम की विश्वसनीयता पर हाईकोर्ट की एक महत्वपूर्ण मुहर है, जिससे लोकतंत्र की चुनावी प्रक्रिया को कानूनी मजबूती मिली है।


