सीजी भास्कर, 28 अप्रैल : छत्तीसगढ़ सरकार ने वैश्विक जलवायु संकट की चुनौतियों से निपटने और राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि अब राज्य की (Climate Action Plan) को केवल कागजों तक सीमित न रखकर ग्राम पंचायत स्तर तक ले जाया जाएगा। बैठक में स्पष्ट किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए स्थानीय स्तर पर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
पंचायत स्तर पर माइक्रो-प्लानिंग और सीएसआर का उपयोग
मुख्य सचिव श्री विकासशील ने स्टियरिंग समिति की बैठक में विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य के हर गांव और हर पंचायत की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए (Climate Action Plan) तैयार की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए बजट की कमी आड़े नहीं आएगी। इसके लिए राज्य में उपलब्ध सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) मद की राशि का उपयोग करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए।
बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र और प्रस्तावित राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि (Climate Action Plan) के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। विभागीय सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में काम करें।
वृक्षारोपण में छत्तीसगढ़ ने रचा इतिहास
बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट (ISFR) 2025 के अनुसार, छत्तीसगढ़ के वन एवं वृक्ष-आवरण में 683 किलोमीटर की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो पूरे भारत में सर्वाधिक है। यह सफलता राज्य की प्रभावी (Climate Action Plan) का ही परिणाम है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ योजना के तहत अब तक करीब 7 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। वहीं, ‘किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया है। वृक्षारोपण के ये आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार अपनी (Climate Action Plan) के माध्यम से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए कितनी गंभीर है।
जैविक खेती और जल प्रबंधन पर जोर
जलवायु परिवर्तन का सबसे सीधा असर कृषि पर पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार जैविक खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई, जो रसायनों के उपयोग को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जल प्रबंधन भी इस (Climate Action Plan) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य के 300 से अधिक बांधों की हाइड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ-साथ 24 बड़े और मध्यम जलाशयों का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, ताकि जल संकट से निपटा जा सके।
ऊर्जा और परिवहन में बदलाव
राज्य में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ई-वाहनों (इलेक्ट्रिक व्हीकल) के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। परिवहन विभाग अपनी (Climate Action Plan) के तहत आम जनता को पेट्रोल-डीजल वाहनों के बजाय ई-वाहनों की ओर मोड़ रहा है। इसी तरह, ऊर्जा विभाग के माध्यम से किसानों को बड़ी संख्या में सोलर पंप वितरित किए जा रहे हैं, जिससे खेती में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ रहा है।
बहु-विभागीय समन्वय और विशेषज्ञ संस्थाओं की भागीदारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में कृषि, वन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, खनिज, स्वास्थ्य और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिवों ने अपनी-अपनी प्रस्तुति दी। राज्य की (Climate Action Plan) को और अधिक वैज्ञानिक बनाने के लिए नाबार्ड, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस और इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है। अधिकारियों ने राज्य में एक ‘जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र’ (Climate Change Knowledge Centre) स्थापित करने का विचार भी रखा, जो शोध और डेटा विश्लेषण का मुख्य केंद्र होगा।
बैठक में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि कार्बन क्रेडिट से प्राप्त होने वाले लाभों को सीधे सामुदायिक स्तर पर पहुंचाया जाना चाहिए। अंततः, छत्तीसगढ़ की यह (Climate Action Plan) न केवल राज्य के पर्यावरण को बचाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी जलवायु लचीला (Climate Resilient) बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।


