सीजी भास्कर, 28 अप्रैल । खैरागढ़ में निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी पर आखिरकार प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ और महंगी किताबों के खेल को रोकने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल साव ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। (Tightening the noose on the arbitrariness of private schools)
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी निजी स्कूलों को छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय अधिनियम के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। अब बिना ठोस कारण फीस बढ़ाना संभव नहीं होगा। विशेष रूप से 8% से अधिक फीस वृद्धि करने वाले स्कूलों को इसका पूरा औचित्य बताना होगा—किस आधार पर वृद्धि की गई और किस बैठक में इसकी मंजूरी मिली।
किताबों को लेकर लिया गया बड़ा फैसला : Tightening the noose on the arbitrariness of private schools
सबसे बड़ा फैसला किताबों को लेकर लिया गया है। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए केवल NCERT की किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। निजी प्रकाशकों की किताबें थोपने पर रोक लगा दी गई है। वहीं 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को किसी विशेष दुकान या प्रकाशन से किताब खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा।
प्रशासन ने शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि अभिभावकों की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई हो सके। डीईओ ने साफ चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह कदम शिक्षा के नाम पर हो रही मनमानी और आर्थिक शोषण पर बड़ा प्रहार माना जा रहा है, जिससे अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। (Tightening the noose on the arbitrariness of private schools)


