सीजी भास्कर, 29 अप्रैल। छत्तीसगढ़ में महिलाओं को विकास के केंद्र में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्ष 2026-27 को “महतारी गौरव वर्ष” घोषित किया है। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। (Mother’s Pride Year 2026)
महिलाओं के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर
इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार का मानना है कि जब महिलाएं सशक्त होंगी, तभी समाज और राज्य का समग्र विकास संभव होगा।
वर्ष 2026-27 के बजट में महिला एवं बाल विकास के लिए 8,245 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने, पोषण सुधारने और महिलाओं के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया जाएगा।
“महतारी वंदन योजना” इस अभियान की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसके तहत लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। अब तक 15,595 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
स्वयं सहायता समूहों को रियायती ऋण : Mother’s Pride Year 2026
इसके अलावा “रानी दुर्गावती योजना” के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर बेटियों को 1.50 लाख रुपये की सहायता दी जाती है, जिससे उनकी शिक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए “लखपति दीदी” जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों को रियायती ऋण, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन जैसी सेवाएं संचालित
महिलाओं की सुरक्षा के लिए 181 हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर और डायल-112 जैसी सेवाएं संचालित हैं। साथ ही 250 “महतारी सदनों” के निर्माण की योजना भी बनाई गई है, जिससे महिलाओं को सुरक्षित और सहयोगात्मक वातावरण मिल सके। (Mother’s Pride Year 2026)
सरकार पोषण और शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रही है। 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।
महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा
“महतारी गौरव वर्ष” के तहत कई प्रेरणादायक उदाहरण सामने आए हैं, जहां महिलाओं ने स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता हासिल की है। यह पहल न केवल महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि राज्य में समावेशी विकास और सामाजिक न्याय को भी मजबूत कर रही है।


