सीजी भास्कर, 02 मई : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई (US-Iran Tensions) को समाप्त घोषित कर दिया है। उन्होंने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को जानकारी देते हुए कहा कि 60 दिन की कानूनी समयसीमा पूरी होने के बाद यह अभियान अब खत्म हो चुका है। ट्रंप ने साफ किया कि वे आक्रामक बयानबाजी के बावजूद कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देना चाहते हैं, हालांकि जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प भी खुला रहेगा।
ट्रंप ने सांसदों को लिखे पत्र में बताया कि 7 अप्रैल 2026 के बाद से अमेरिका और ईरान (US-Iran Tensions) के बीच किसी भी तरह की फायरिंग नहीं हुई है। उनके अनुसार 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई शत्रुता अब समाप्त मानी जा रही है। इस घोषणा को उस विवाद को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें युद्ध जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक मानी जा रही थी।
अमेरिका में 1973 में पारित ‘युद्ध शक्तियां संकल्प’ के तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई की जानकारी कांग्रेस को देनी होती है और 60 दिनों के भीतर उस कार्रवाई को समाप्त करना होता है, जब तक कि कांग्रेस इसकी अनुमति न दे। ट्रंप प्रशासन ने 2 मार्च को कांग्रेस को औपचारिक सूचना दी थी, जिसके बाद 1 मई को यह समयसीमा पूरी हो गई।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि वे पूर्ण सैन्य हमले के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना था कि “क्या हमें पूरी ताकत से हमला कर इसे हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए या फिर समझौते का रास्ता अपनाना चाहिए मैं मानवीय आधार पर पहले विकल्प का समर्थन नहीं करता।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर बातचीत विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई एक विकल्प के रूप में बनी रहेगी।
उन्होंने ईरान की आंतरिक स्थिति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि तेहरान का नेतृत्व बिखरा हुआ है और आपसी मतभेदों के कारण वार्ता प्रक्रिया कमजोर पड़ रही है। ट्रंप के अनुसार, “वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन उनके भीतर स्पष्ट नेतृत्व नहीं है, जिससे स्थिति जटिल हो गई है।”
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान की ओर से आए प्रस्तावों से वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि आगे की स्थिति बातचीत की दिशा पर निर्भर करेगी। फिलहाल कूटनीति और सैन्य कार्रवाई दोनों विकल्प खुले हुए हैं।
गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 2 मार्च को कांग्रेस को इसकी जानकारी दी थी। 60 दिन की कानूनी अवधि पूरी होने के बाद अब इस अभियान को समाप्त घोषित किया गया है, हालांकि भविष्य को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।


