आशुतोष सिंह राजपूत
सीजी भास्कर, 05 मई : गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत अमलीपदर क्षेत्र में शराबखोरी ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। आबकारी विभाग और पुलिस की रहमोकरम पर शराबी अब केवल दुकानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों के खेतों और पवित्र देवस्थलों को अपना अड्डा बना चुके हैं। गरियाबंद में बढ़ता यह शराब आतंक (Liquor Menace Gariaband) प्रशासन की उस निष्क्रियता का सबूत है, जहां सरकारी आहाते होने के बावजूद लोग सार्वजनिक जगहों पर उत्पात मचा रहे हैं।
खेतों में कांच के टुकड़े और बर्बाद होती फसलें
अमलीपदर के किसानों के लिए अब खेती करना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। शराबी खेतों में घुसकर न केवल फसलों को रौंद रहे हैं, बल्कि शराब पीने के बाद कांच की बोतलें वहीं फोड़ देते हैं। इससे खेतों में काम करने वाले मजदूरों और किसानों के पैर लहूलुहान हो रहे हैं। इस शराब आतंक (Liquor Menace Gariaband) के कारण ग्रामीण इलाकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई इन नशेड़ियों के शौक की भेंट चढ़ रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं।
मंदिरों की पवित्रता भंग, आबकारी विभाग मौन
हद तो तब हो गई जब शराबियों ने धार्मिक स्थलों और देवस्थलों को भी नहीं बख्शा। इन पवित्र स्थानों पर शराब पीना और गंदगी फैलाना अब आम बात हो गई है। ताज्जुब की बात यह है कि आबकारी विभाग इन सब से बेखबर बना हुआ है। निगरानी और सख्ती के नाम पर विभाग का रिकॉर्ड शून्य है। इस शराब आतंक (Liquor Menace Gariaband) ने क्षेत्र की सामाजिक शांति को भंग कर दिया है, जिससे महिलाओं और बच्चों में असुरक्षा का माहौल है। आखिर क्यों आबकारी विभाग नियमों का पालन कराने में नाकाम साबित हो रहा है?
पुलिस की कार्रवाई केवल ‘सड़क’ तक सीमित
वहीं दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। पुलिस की टीम केवल सड़कों पर ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ के नाम पर चालान काटने में व्यस्त है, जबकि गांवों के भीतर और सार्वजनिक स्थलों पर खुलेआम चल रहे इस गंदे खेल पर उनकी नजर नहीं पड़ती। लोगों का आरोप है कि पुलिस केवल खानापूर्ति कर रही है, जबकि असली समस्या गलियों और खेतों में पसरी हुई है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है या फिर इन शराबियों को सत्ता और सिस्टम का संरक्षण प्राप्त है?


