सीजी भास्कर, 5 मई : पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब एक बड़े वैश्विक अभियान पर निकलने वाले हैं। पीएम मोदी 15 से 20 मई तक चार यूरोपीय देशों इटली, नॉर्वे, स्वीडन और नीदरलैंड की यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री की यह विदेश यात्रा (PM Modi Europe Visit 2026) भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते के बाद पहली बड़ी यात्रा है। कूटनीतिक गलियारों में इस दौरे को भारत की बढ़ती वैश्विक साख और भविष्य की व्यापारिक रणनीतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल
पीएम मोदी अपने दौरे के दौरान 15 और 16 मई को नॉर्वे में आयोजित होने वाले तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन (India-Nordic Summit) में शिरकत करेंगे। यह सम्मेलन पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के कारण स्थगित कर दिया गया था। इस विदेश यात्रा (PM Modi Europe Visit 2026) के दौरान पीएम मोदी आइसलैंड, नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड और स्वीडन के प्रधानमंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। चर्चा का मुख्य केंद्र हरित ऊर्जा, ‘ब्लू इकोनॉमी’ और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे होंगे। गौरतलब है कि EFTA देशों ने भारत में 100 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश का वादा किया है, जिसे धरातल पर उतारने की दिशा में यह दौरा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा तकनीक पर रहेगा फोकस
यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए काफी अहम है। इटली के साथ रक्षा औद्योगिक ढांचे और नीदरलैंड के साथ सेमीकंडक्टर एवं उन्नत प्रौद्योगिकी पर चर्चा होने की प्रबल संभावना है। इस विदेश यात्रा (PM Modi Europe Visit 2026) के जरिए भारत एआई (AI), निवेश और व्यापारिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना चाहता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान कुछ समय के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी रुक सकते हैं, जो पश्चिम एशिया संकट के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
मिशन 2047: विकसित भारत की ओर बढ़ते कदम
चुनावों में मिली प्रचंड जीत के बाद पीएम मोदी का यह दौरा दिखाता है कि भारत अब क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ वैश्विक नेतृत्व की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। हरित हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय देशों का सहयोग भारत को एक ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने में मदद करेगा। इससे पहले फरवरी 2026 में पीएम मोदी ने इजराइल और मलेशिया का सफल दौरा किया था, जिसने भारत के कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी थी।


