सीजी भास्कर, 05 मई। कानपुर के रावतपुर इलाके में मंगलवार को अचानक अफरा तफरी का माहौल बन गया। आस पास के लोग जब घर के बाहर (Dog Attack) जमा हुए तो अंदर से चीख पुकार की आवाजें सुनाई दे रही थीं। कुछ ही देर में खबर फैल गई कि एक पालतू कुत्ते ने अपनी ही मालकिन पर हमला कर दिया है।
लोगों के चेहरों पर डर साफ दिखाई दे रहा था। कई लोग पुराने हादसे को याद कर रहे थे और कह रहे थे कि यह वही कुत्ता है जिसने पहले भी इस घर में बड़ा नुकसान किया था। माहौल में गुस्सा और डर दोनों एक साथ महसूस हो रहे थे।
क्या है पूरा मामला Dog Attack
उत्तर प्रदेश के कानपुर में 63 वर्षीय किरण त्रिवेदी अपने घर में थीं, तभी उनके पालतू जर्मन शेफर्ड ने अचानक उन पर हमला कर दिया। कुत्ते ने इस तरह काटा कि उनके हाथ, पैर और कमर पर गहरे घाव हो गए।
परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए कई टांके लगाए। फिलहाल वह इलाज के दौरान जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही हैं।
पहले भी हो चुका है हमला
इस घटना ने इसलिए ज्यादा चौंकाया क्योंकि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले पिछले साल इसी कुत्ते ने घर की बुजुर्ग महिला पर हमला किया था। उस हमले में 91 वर्षीय मोहिनी त्रिवेदी की मौत हो गई थी।
इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी कुत्ते को घर में रखा गया। अब दोबारा हुए हमले ने परिवार की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस जानवर ने पहले जान ले ली, वही अब फिर से जानलेवा साबित हुआ।
लोगों में गुस्सा (Dog Attack)
घटना के बाद आसपास के लोगों में नाराजगी साफ दिख रही है। लोग पूछ रहे हैं कि एक हिंसक जानवर को दोबारा घर में क्यों रखा गया। क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि किसी और के साथ ऐसा हादसा न हो।
खतरा क्यों बढ़ जाता है
जर्मन शेफर्ड जैसी नस्ल के कुत्ते काफी ताकतवर और सतर्क माने जाते हैं। लेकिन अगर किसी कारण से उनका व्यवहार आक्रामक हो जाए तो वे खतरनाक भी हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई कुत्ता पहले गंभीर हमला (Dog Attack) कर चुका हो तो उसे बिना निगरानी के घर में रखना जोखिम भरा होता है। ऐसे मामलों में तुरंत विशेषज्ञों की देखरेख जरूरी होती है।


