सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से फर्जीवाड़े (Public Servant Dismissal) और प्रशासनिक कड़ाई की एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के सहारे सालों तक सरकारी नौकरी का आनंद लेने वाले एक प्रधान पाठक (Headmaster) का भंडाफोड़ हो गया है।
प्राथमिक शाला कोल्हुआ में पदस्थ प्रधान पाठक को कलेक्टर के सख्त निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी पाने वाले अन्य संदिग्ध कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। शासकीय सेवा में हुई इस धोखाधड़ी ने (Public Servant Dismissal) शासकीय सेवक बर्खास्तगी और विभागीय जांच की पारदर्शिता पर एक बार फिर मुहर लगा दी है।
‘लालमन’ की आड़ में छिपा था ‘रामदुलार’
यह पूरा मामला (Public Servant Dismissal) वाड्रफनगर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक विद्यालय कोल्हुआ का है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार विभाग को एक शिकायत मिली थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि पदस्थ प्रधान पाठक ने अपने नाम और दस्तावेजों में बड़ी हेराफेरी कर अवैध तरीके से यह सरकारी नौकरी हासिल की है। कलेक्टर के आदेश पर जब एक विशेष जांच टीम ने दस्तावेजों की बारीकी से स्क्रूटनी की और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए, तो पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में यह पूरी तरह साबित हो गया कि नौकरी कर रहे व्यक्ति का वास्तविक नाम रामदुलार (पिता जीतू) है, जबकि उन्होंने सरकारी रिकॉर्ड में खुद को लालमन सिंह (पिता रामवृक्ष) दर्शाकर यह शासकीय पद हासिल किया था।
सिविल सेवा आचरण नियम के तहत गिरी गाज
दस्तावेजों (Public Servant Dismissal) में इतनी गंभीर विसंगति और जालसाजी पाए जाने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम का घोर उल्लंघन माना। जांच प्रतिवेदन के आधार पर आरोपी प्रधान पाठक को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। विभाग अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है, ताकि शासकीय खजाने से उठाई गई सैलरी की रिकवरी की जा सके। यह कड़ी कार्रवाई प्रदेश में (Public Servant Dismissal) (शासकीय सेवक बर्खास्तगी) के नियमों के तहत की गई सबसे बड़ी कार्यवाहियों में से एक है।


