सीजी भास्कर, 09 मई : बस्तर (Bastar Herbal Coffee Innovation) के नैसर्गिक सौंदर्य और समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के बीच अब एक नई सुगंधित क्रांति आकार ले रही है। ‘वेस्ट टू बेस्ट’ की अवधारणा को हकीकत में बदलते हुए दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार ने एक ऐसा नवाचार किया है, जो बस्तर को वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिला सकता है. विशाल ने छिंद (खजूर की एक स्थानीय प्रजाति) के उन बीजों से हर्बल कॉफी तैयार की है, जिन्हें अब तक बस्तर में पूरी तरह व्यर्थ और कचरा समझा जाता था.
दो साल का कड़ा शोध और ‘कैफीन मुक्त’ विकल्प
बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की शिक्षा प्राप्त करने वाले विशाल ने अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए इस चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम किया. उनका उद्देश्य कॉफी (Bastar Herbal Coffee Innovation) के उन शौकीनों को एक स्वस्थ विकल्प प्रदान करना है जो स्वाद तो चाहते हैं, लेकिन कैफीन के दुष्प्रभावों से बचना चाहते हैं. विशाल का यह सफर करीब दो वर्षों के गहन शोध और प्रयोगों का परिणाम है, जिसमें उन्होंने इंटरनेट की आधुनिक जानकारी और स्थानीय पारंपरिक समझ का बेहतरीन तालमेल बिठाया है.
हर्बल कॉफी की मुख्य विशेषताएं
पूरी तरह कैफीन मुक्त : इस कॉफी की सबसे बड़ी खूबी इसका कैफीन मुक्त होना है, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए वरदान है.
एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर : छिंद के प्राकृतिक गुणों के कारण इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं.
बेहतरीन स्वाद : विशाल का मानना है कि लोग स्वाद और आदत के कारण कॉफी पीते हैं, और उनकी यह खोज उसी स्वाद को बिना किसी नुकसान के प्रदान करती है.
मुख्यमंत्री ने ‘इनोवेशन महाकुंभ’ में किया सम्मानित
विशाल के इस नवाचार को हाल ही में बड़ी पहचान मिली जब उन्हें शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ. इस उपलब्धि के लिए उन्हें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों और आम जनता ने भी इस हर्बल कॉफी का स्वाद चखा और इसकी जमकर सराहना की.
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
विशाल केवल एक उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं हैं। वे दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के यूथ अप फाउंडेशन के माध्यम से स्थानीय युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहे हैं. उनका लक्ष्य है कि बस्तर के ग्रामीणों को जंगलों में मिलने वाले छिंद के बीजों (Bastar Herbal Coffee Innovation) को एकत्र करने के बदले अतिरिक्त आय मिले और गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर सृजित हों. हालांकि यह प्रोजेक्ट अभी टेस्टिंग और विकास के दौर में है और इसका आधिकारिक लॉन्च होना बाकी है, लेकिन विशाल के इस अटूट प्रयास ने यह साबित कर दिया है कि यदि दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय ‘वेस्ट’ को भी वैश्विक स्तर के ‘बेस्ट’ उत्पाद में बदला जा सकता है.


