सीजी भास्कर, 09 मई : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम जगतरा में पिछले 24 घंटों से चला रोमांचक और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन (Leopard Rescue) आखिरकार शनिवार सुबह सुखद मोड़ पर समाप्त हुआ। वन विभाग, पुलिस प्रशासन और रायपुर से आई विशेषज्ञों की टीम की संयुक्त कोशिशों के बाद तेंदुआ सुरक्षित अपने प्राकृतिक आवास जंगल की ओर लौट गया है। प्रशासन ने ड्रोन फुटेज और पगमार्क (पंजों के निशान) के आधार पर इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है।
कुएं में गिरा था तेंदुआ
घटनाक्रम (Leopard Rescue) की शुरुआत शुक्रवार को हुई जब ग्राम जगतरा के एक खेत में स्थित कुएं में एक तेंदुआ गिर गया। ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग का अमला तुरंत सक्रिय हुआ। कुएं में लगभग 10 फीट पानी होने के कारण उसे बेहोश (ट्रेंकुलाइज) करना खतरनाक हो सकता था, क्योंकि डूबने का डर था। ऐसे में वन विभाग ने सूझबूझ दिखाते हुए जेसीबी मशीन और खाट (खटिया) की मदद से उसे बाहर निकालने का रास्ता बनाया।
रेस्क्यू के बाद अफरा-तफरी और दहशत
कई घंटों की मशक्कत के बाद जैसे ही तेंदुआ (Leopard Rescue) कुएं से बाहर निकला, उसने जंगल की बजाय गांव की ओर लंबी छलांग लगा दी। तेंदुए को अपनी ओर आता देख वहां मौजूद भीड़ में भगदड़ मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हालांकि, तेंदुए ने किसी पर हमला नहीं किया और पास के ही एक खेत में जाकर छिप गया। इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई और प्रशासन ने तुरंत इलाके को ‘हाई अलर्ट’ पर डाल दिया।
ड्रोन कैमरे से निगरानी और ‘धारा 163’ का प्रयोग
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए, ताकि भीड़ को हटाया जा सके। रायपुर से पहुंची विशेषज्ञ टीम ने रातभर ड्रोन कैमरों के जरिए खेतों की निगरानी की। देर रात ड्रोन फुटेज में तेंदुआ एक खेत में आराम करता हुआ दिखाई दिया। टीम ने उसे परेशान करने के बजाय उसे सुरक्षित रास्ता देने की रणनीति अपनाई।
सुरक्षित जंगल वापसी की पुष्टि
वन मंडलाधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि तेंदुआ (Leopard Rescue) पूरी तरह स्वस्थ था और उसे कोई चोट नहीं आई थी। रात के सन्नाटे में रास्ता मिलते ही वह चुपचाप जंगल की ओर निकल गया। शनिवार सुबह जब टीम ने पगमार्क की जांच की और फिर से ड्रोन सर्वे किया, तो पंजों के निशान जंगल की ओर जाते मिले। वन विभाग ने इस पूरे अभियान को टीमवर्क और आधुनिक तकनीक की बड़ी सफलता बताया है। साथ ही ग्रामीणों से अपील की है कि वन्यजीवों के दिखने पर भीड़ न जुटाएं और संयम बरतें ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।


