सीजी भास्कर, 09 मई : राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री निवास के घेराव के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शन ने अब कानूनी (NSUI FIR) मोड़ ले लिया है। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए 700 से लेकर 1000 अज्ञात एनएसयूआई (NSUI) कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। प्रदर्शनकारियों पर आरोप है कि उन्होंने सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए न केवल शासकीय कार्य में बाधा डाली, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला भी किया। यह पूरी घटना अब शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है और पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है।
बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश और पथराव
जानकारी के अनुसार, एनएसयूआई (NSUI FIR) के कार्यकर्ता विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने निकले थे। जैसे ही प्रदर्शनकारी शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए आगे बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेड्स लगाए थे। पुलिस के अनुसार, शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण लग रहा था, लेकिन अचानक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
कार्यकर्ताओं ने पहले बैरिकेड्स के ऊपर चढ़कर उन्हें धकेलने और तोड़ने की कोशिश की। जब पुलिस ने उन्हें पीछे धकेलने का प्रयास किया, तो भीड़ के बीच से पथराव शुरू हो गया। आरोप है कि प्रदर्शनकारी अपने साथ लाठी-डंडे और पत्थर लेकर आए थे, जिनका इस्तेमाल उन्होंने सुरक्षा बल पर हमला करने के लिए किया।
ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी हुए घायल
इस हिंसक झड़प में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात कई पुलिस जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पुलिस द्वारा जारी सूची के अनुसार, घायलों में मोहन ध्रुव, माडवी बुधरा, रमेश कुडियाम, जैनेन्द्र कुमार नाग, भोलेन्द्र ठाकुर, सोमा मडकाम, रामसिंह कवाची, उंदाम राजू, अनिल भारती और सोयम मुकेश शामिल हैं।
पथराव और लाठीचार्ज जैसी स्थिति के बीच इन जवानों को चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, जवानों की स्थिति फिलहाल खतरे से बाहर है, लेकिन कुछ को गहरी चोटें आई हैं। पुलिस विभाग ने अपने जवानों पर हुए इस हमले को अत्यंत गंभीरता से लिया है।
गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
सिटी कोतवाली थाने में दर्ज (NSUI FIR) इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बलवा, शासकीय कर्मचारी पर हमला, शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। प्राथमिकी में 700 से 1000 अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक प्रदर्शन में हिंसा की कोई जगह नहीं है। कानून को हाथ में लेने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो फुटेज से होगी पहचान
रायपुर पुलिस अब घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और मीडिया कर्मियों द्वारा बनाए गए वीडियो फुटेज को खंगाल रही है। इसके अलावा, ड्रोन कैमरों से रिकॉर्ड की गई तस्वीरों की भी मदद ली जा रही है। पुलिस का लक्ष्य उन मुख्य चेहरों को चिन्हित करना है जिन्होंने भीड़ को उकसाया और पुलिस पर पत्थर बरसाए। पुलिस का दावा है कि जल्द ही चिन्हित आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


