सीजी भास्कर, 9 मई। दुर्ग जिले में आरटीई फंड में अनियमितता एवं गबन को लेकर शिकायत की गई है। इस संबंध में निदेशक वी. रामानधा रेड्डी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दुर्ग कलेक्टर को पत्र भेजा है। (Allegations of misappropriation of RTE funds)
शिकायतकर्ता द्वारा पहचान गोपनीय रखे जाने का अनुरोध : Allegations of misappropriation of RTE funds
आयोग को ई-बाल निदान पोर्टल पर सुकुमारन से एक शिकायत प्राप्त हुई है। आरटीई अधिनियम अंतर्गत निजी विद्यालयों को प्रदत्त अनुदान में दुर्ग जिले में फर्जी छात्र संख्या दर्शाकर एवं अभिलेखीय हेरफेर के माध्यम से शासकीय धन राशि का व्यापक दुरुपयोग / गबन किए जाने के प्रथम दृष्टया साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिससे वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन हुआ है।
शिकायतकर्ता द्वारा प्रकरण के संबंध में ठोस एवं सत्यापनीय साक्ष्य उपलब्ध कराए जाने हेतु जांच में सहयोग की सहमति व्यक्त की गई है, तथापि व्यक्तिगत सुरक्षा के दृष्टिगत उनकी पहचान गोपनीय रखे जाने का अनुरोध किया गया है।
प्रकरण में संबंधित विभाग द्वारा की गई कार्रवाई तथा आयोग को 20 दिनों के भीतर अवगत कराने कहा गया है। पत्र में उल्लेख है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 की धारा-3 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। Allegations of misappropriation of RTE funds
आयोग को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पास्को) अधिनियम, 2012, किशोर न्याय अधिनियम, 2015 तथा निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के उचित और प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करने का कार्य सौंपा गया है।
सीपीसीआर अधिनियम, 2005 की धारा 13 के तहत आयोग को देश में बाल अधिकारों और संबंधित मामलों के रक्षण और संरक्षण के लिए अधिदेशित किया गया है। इसके साथ ही आयोग को सीपीसीआर अधिनियम, 2005 की धारा 14 के तहत धारा 13 (1) (जे) में निर्दिष्ट किसी विषय की जांच करते समय और विशिष्ट विषयों के संबंध में वह सभी शक्तियां प्राप्त हैं, जो सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय को होती है।


