सीजी भास्कर, 09 मई : महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम जंगलबेड़ा (Saraipali Solar Plant Protest) में प्रस्तावित गोदावरी सोलर पावर प्लांट को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। पिछले करीब चार महीनों से आंदोलनरत ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति गुरुवार को उस समय सार्वजनिक हो गई, जब पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई तीखी बहस और झूमाझटकी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। ग्रामीण 6 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, लेकिन प्रशासन अब तक इस गतिरोध को सुलझाने में नाकाम रहा है।
रास्ता रोकने पर पुलिस से हुई भिड़ंत
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि सोलर प्लांट (Saraipali Solar Plant Protest) के निर्माण के लिए सामग्री ले जा रहे भारी ट्रकों को ग्रामीणों ने रोकने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद सरायपाली पुलिस ने जब ग्रामीणों को सड़क से हटाने की कोशिश की, तो स्थिति बिगड़ गई। ग्रामीणों और पुलिस बल के बीच जमकर धक्का-मुक्की और बहस हुई। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें जबरन हटाया जा रहा है।
बिना ग्रामसभा की अनुमति के निर्माण का आरोप
आंदोलनकारियों का मुख्य आरोप है कि गोदावरी सोलर प्लांट (Saraipali Solar Plant Protest) प्रबंधन लगभग 400 एकड़ से अधिक की भूमि पर बिना ग्रामसभा की वैध अनुमति के निर्माण कार्य कर रहा है। ग्रामीणों ने निम्नलिखित गंभीर मुद्दे उठाए हैं। परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की गई है। तालाब और ग्रामीणों की निस्तार भूमि को प्रभावित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क पर 15 टन से अधिक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक होने के बावजूद प्लांट की गाड़ियां लगातार चल रही हैं, जिससे सड़क खराब हो रही है।
महिला पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
धरने पर बैठी महिलाओं ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी, इसके बावजूद पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को हटाने का प्रयास किया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले ही एसडीएम और थाना प्रभारी को भारी वाहनों के आवागमन को लेकर आवेदन दिया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस का पक्ष: रास्ता रोकना गैरकानूनी
वहीं, सरायपाली थाना प्रभारी नीतेश सिंह ने पुलिस का बचाव करते हुए कहा कि ग्रामीणों ने आम रास्ते को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया था, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही थी। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सड़क खराब होती है, तो संबंधित विभाग प्लांट प्रबंधन से जुर्माना वसूलेगा, लेकिन किसी को भी सड़क रोकने का अधिकार नहीं है। थाना प्रभारी ने यह भी कहा कि बुजुर्ग महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें वहां से हटाया गया और स्टाफ की कमी के चलते उन्हें स्वयं मोर्चा संभालना पड़ा। फिलहाल जंगलबेड़ा गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। प्रशासन की ओर से अब तक आंदोलनकारियों के साथ किसी सार्थक वार्ता की पहल नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ सकता है।


