सीजी भास्कर, 16 मई : राज्य शासन ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के बेहद वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी अरुण देव गौतम (DGP Arun Deo Gautam) को प्रदेश का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर दिया है। गृह विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। गौरतलब है कि अरुण देव गौतम पिछले एक साल से राज्य में प्रभारी डीजीपी के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए अब उन्हें छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कमान पूर्णकालिक रूप से सौंप दी गई है।
किसान परिवार से शीर्ष पद तक का सफर
छत्तीसगढ़ के नए पुलिस कप्तान अरुण देव गौतम (DGP Arun Deo Gautam) का जीवन और उनका अब तक का सफर बेहद प्रेरणादायी रहा है। 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम का जन्म उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के एक छोटे से गांव अभयपुर में, एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा गांव के ही एक सरकारी स्कूल में हुई। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपनी लगन से आगे की पढ़ाई जारी रखी और इलाहाबाद के राजकीय इंटर कॉलेज से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं सम्मानजनक अंकों के साथ उत्तीर्ण कीं।
उच्च शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ
नए डीजीपी अरुण देव गौतम (DGP Arun Deo Gautam) पुलिस बेड़े में अपने उच्च शैक्षणिक स्तर के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने शिक्षा के गढ़ माने जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और फिर राजनीति शास्त्र (Political Science) में एमए की डिग्री हासिल की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली पहुंचे, जहां से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) विषय में एमफिल (M.Phil) की उपाधि प्राप्त की। उनकी यह उच्च शैक्षणिक पृष्ठभूमि राज्य के पुलिस प्रशासन को एक नया और आधुनिक दृष्टिकोण देने में सहायक साबित होगी।
भोपाल में रहे पहले एसपी DGP Arun Deo Gautam
साल 1992 में जब उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ, तब छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश एक ही राज्य हुआ करते थे। चयन के बाद उन्हें मध्य प्रदेश कैडर आवंटित किया गया। उन्होंने एक प्रशिक्षु (प्रोबेशनर) अधिकारी के रूप में अपनी पहली सेवाएं जबलपुर में दीं, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर पुलिसिंग की बारीकियों को सीखा। इसके बाद, बतौर पुलिस अधीक्षक (SP) उनकी पहली स्वतंत्र पोस्टिंग मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई। भोपाल जैसे संवेदनशील और वीवीआईपी जिले की कमान संभालकर उन्होंने अपनी प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया, जिसने उन्हें पुलिस प्रशासन में एक कुशल रणनीतिकार के रूप में स्थापित किया।
छत्तीसगढ़ गठन के बाद चुने छह महत्वपूर्ण जिले
वर्ष 2000 में जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब अरुण देव गौतम ने छत्तीसगढ़ कैडर को चुना। नए राज्य के निर्माण के बाद से ही उन्होंने यहां के पुलिस ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। वे छत्तीसगढ़ के छह बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिलों के एसपी रह चुके हैं। इनमें कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर शामिल हैं। इन अलग-अलग जिलों में काम करने के लंबे अनुभव के कारण उन्हें छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और सुरक्षा स्थितियों की जमीनी समझ है, जो राज्य के पुलिस प्रशासन को शीर्ष स्तर पर चलाने में बेहद मददगार साबित होगी।
नई जिम्मेदारी और चुनौतियां
पिछले एक वर्ष से प्रभारी डीजीपी (DGP Arun Deo Gautam) के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में कई बड़े सुरक्षा अभियान और प्रशासनिक सुधार सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं। अब पूर्णकालिक डीजीपी बनने के बाद उनके कंधों पर राज्य में कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने, नक्सल मोर्चे पर प्रभावी कार्रवाई करने और आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस प्रशासन को पूरी तरह तैयार करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।



