सीजी भास्कर, 21 मई। बेंगलुरु एयरपोर्ट पर गुरुवार को उस समय हलचल मच (Air India) गई जब दिल्ली से पहुंची एक यात्री उड़ान की लैंडिंग के दौरान तकनीकी गड़बड़ी सामने आई। विमान के नीचे उतरते ही एयरपोर्ट अधिकारियों और ग्राउंड स्टाफ की गतिविधियां अचानक बढ़ गईं। घटना के बाद यात्रियों के बीच भी कुछ देर के लिए चिंता का माहौल बन गया।
हालांकि राहत की बात यह रही कि विमान में सवार सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित रहे। एयरलाइन की टीम तुरंत सक्रिय हुई और यात्रियों की सहायता के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी गई। घटना के बाद विमान को जांच के लिए रोक दिया गया है।
लैंडिंग के दौरान रनवे से टकराया पिछला हिस्सा : Air India
जानकारी के मुताबिक दिल्ली से बेंगलुरु पहुंची एयर इंडिया की उड़ान का पिछला हिस्सा लैंडिंग के दौरान रनवे से टकरा गया। बताया गया कि विमान की टेल नीचे की सतह से छू गई जिसके बाद सुरक्षा कारणों से विमान को तुरंत ग्राउंडेड कर दिया गया।
179 लोग थे सवार
घटना के समय विमान में पायलट और केबिन क्रू समेत कुल 179 लोग मौजूद थे। एयरलाइन अधिकारियों ने बताया कि किसी भी यात्री को चोट नहीं पहुंची। सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और एयरपोर्ट पर सहायता टीम तैनात की गई।
दिल्ली लौटने वाली उड़ान रद्द
यह विमान बेंगलुरु से वापस दिल्ली आने वाला था लेकिन घटना के बाद उड़ान रद्द कर दी गई। एयरलाइन की ओर से कहा गया कि विमान की पूरी तकनीकी जांच होने के बाद ही उसे दोबारा उड़ान के लिए तैयार किया जाएगा।
यात्रियों के लिए दूसरी व्यवस्था
एयरलाइन के प्रवक्ता ने बताया कि प्रभावित यात्रियों के लिए दूसरी उड़ान और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था (Air India) की जा रही है। ग्राउंड टीम लगातार यात्रियों की मदद में जुटी रही और उन्हें जरूरी जानकारी दी जाती रही।
वेक टर्बुलेंस को माना जा रहा वजह
प्रारंभिक जानकारी में घटना की वजह वेक टर्बुलेंस बताई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक विमान के उतरने से पहले एक बड़ा मालवाहक विमान उड़ान भर चुका था। ऐसी स्थिति में हवा में बनने वाली तेज भंवरें दूसरे विमानों को प्रभावित कर सकती हैं। इसी दौरान पायलटों ने आखिरी समय में गो अराउंड करने का फैसला लिया था।
क्या होता है वेक टर्बुलेंस
जब कोई बड़ा विमान उड़ता है तो उसके पंखों के पीछे तेज घूमती हुई हवा की भंवरें बनती हैं जिन्हें वेक टर्बुलेंस (Air India) कहा जाता है। ये भंवर कुछ समय तक हवा में बने रहते हैं और दूसरे विमानों के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान इसका खतरा ज्यादा रहता है।



