सीजी भास्कर, 25 मई। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम (Liquor Scam) सामने आया। करीब दो साल से जेल में बंद पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में फिर हलचल तेज हो गई है। हालांकि अदालत ने राहत के साथ सख्त शर्त भी रखी है। निरंजन दास को फिलहाल छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा। उन्हें केवल जांच और अदालत में पेशी के दौरान ही प्रदेश आने की अनुमति रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला : Liquor Scam
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने की। अदालत ने शराब नीति से जुड़े दो मामलों और मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में सुनवाई के बाद जमानत मंजूर की। इससे पहले इस मामले में अनिल टुटेजा और एपी त्रिपाठी को भी राहत मिल चुकी है।
दो साल से जेल में बंद थे निरंजन दास
पूर्व आबकारी आयुक्त पर शराब नीति में कथित गड़बड़ी, कमीशनखोरी और सिंडिकेट के जरिए बड़े घोटाले में शामिल होने के आरोप लगे हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच करोड़ों रुपए के अवैध लेनदेन और शराब कारोबार में हेरफेर किया गया था।
प्रदेश से बाहर रहने की शर्त
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए साफ कहा कि निरंजन दास राज्य से बाहर रहेंगे। उन्हें केवल मुकदमे की सुनवाई और जांच में शामिल होने के लिए ही छत्तीसगढ़ आने की अनुमति होगी। हालांकि अदालत ने भविष्य में शर्तों में ढील मांगने का रास्ता भी खुला रखा है।
क्या है पूरा शराब घोटाला
इस मामले की जांच प्रवर्तन एजेंसी और आर्थिक अपराध जांच एजेंसियां (Liquor Scam) कर रही हैं। जांच में दावा किया गया कि शराब कारोबार में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध कमीशन वसूला गया। आरोप है कि डिस्टलरी संचालकों से कमीशन लेने से लेकर नकली होलोग्राम के जरिए शराब बिक्री तक कई स्तर पर गड़बड़ी हुई।
नकली होलोग्राम और अवैध बिक्री के आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक अतिरिक्त शराब तैयार कर उस पर नकली होलोग्राम लगाए गए और सरकारी दुकानों के जरिए बिक्री कराई गई। बताया गया कि कुछ जिलों में शराब खपाने के लिए अलग व्यवस्था बनाई गई थी और बिक्री रिकॉर्ड छिपाने के भी आरोप लगे हैं।
सप्लाई जोन में हेरफेर का दावा
मामले में यह भी आरोप है कि शराब सप्लाई जोन तय करने में भी गड़बड़ी (Liquor Scam) की गई और कथित तौर पर अवैध उगाही की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे मामले में करोड़ों रुपए के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं।



